संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जनपद में बिजली निगम के 5.20 लाख उपभोक्ता हैं। अब तक करीब डेढ़ लाख स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। एक ओर बिजली निगम स्मार्ट मीटर की खूबियां गिना रहा है, तो दूसरी तरफ यह उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन गया है। पैसे खत्म होने पर तुरंत बिजली काट दे रहे। वहीं ऑनलाइन रिचार्ज करने पर न तो बिजली आ रही है और न ही तुरंत पैसा, बल्कि स्मार्ट मीटर में एंट्री होने में तीन दिन तक लग जा रहे हैं। वह भी काफी दौड़भाग व शिकायत करने के बाद राहत नहीं मिल रही है। स्मार्ट मीटर को लेकर बिजली निगम की दलील है उपभोक्ता को खर्च होने वाली हर यूनिट का हिसाब मिलेगा। लेकिन, यही व्यवस्था अब उपभोक्ताओं के गले की फांस बनती हुई नजर आ रही है।
उपभोक्ता राकेश मिश्रा, संजीव प्रसाद ने बताया कि निगेटिव बैलेंस होने पर बत्ती गुल हो जा रही है। इसके बाद रिचार्ज करने के बाद भी न तो बिजली आपूर्ति बहाल हो रही है और न ही भुगतान किया गया पैसा वापस आ रहा है। इसके लिए टोल फ्री नंबर, पावर हाउस व बिजली निगम के अभियंताओं का चक्कर लगाना पड़ रहा है। शिकायत पत्र देने के बाद भुगतान किया हुआ पैसा दो से तीन दिन बाद स्मार्ट मीटर में एंट्री हो रहा है। तब तक बिना बिजली के रहना पड़ रहा है। स्मार्ट मीटर की व्यवस्था की खामियों को दूर किए बिना इसे उपभोक्ताओं पर थोप दिया गया है। इसका खामियाजा उपभोक्ता भुगत रहे हैं।
मीटर तत्काल अपडेट नहीं हुआ : नगर के बंशीबाजार निवासी कृष्णमोहन गुप्ता ने बताया कि उनके यहां स्मार्ट मीटर लगा है। बत्ती गुल होने पर 22 अप्रैल को दो किस्तों में एक हजार व 500 रुपये जमा किया, लेकिन रिचार्ज तुरंत अपडेट नहीं हुआ। 23 अप्रैल की शाम को रिचार्ज अपडेट हुआ।
दो दिन बाद रिचार्ज अपडेट हुआ : खोवामंडी के विजय कुमार ने बताया कि उन्होंने 3500 रुपये का रिचार्ज किया था, लेकिन स्मार्ट मीटर में रिचार्ज अपडेट नहीं हुआ। पावर हाउस व एसडीओ के यहां गुहार लगाने पर दो दिन बाद रिचार्ज अपडेट हुआ।
दस दिन बाद भी नहीं आई बिजली : रजौली के राधेश्याम ने बताया कि 14 अप्रैल को ऑनलाइन तरीके से उन्होंने 512 रुपये का रिचार्ज किया था, लेकिन अभी तक रिचार्ज अपडेट नहीं हुआ। इसके लिए बार-बार पावर हाउस दौड़ रहा हूं। अब लगता है कि शायद मेरा पैसा वापस नहीं आएगा।
स्मार्ट मीटर में निगेटिव बैलेंस होने पर जिन उपभोक्ताओं का पुराना बकाया रह रहा है, रिचार्ज करने के बाद 25 प्रतिशत धनराशि पुराने बकाये में जमा हो जा रही है। इक्का-दुक्का जो केस आ रहे हैं, उनका त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। - विवेक खन्ना, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम