गाजीपुर। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच गाजीपुर जिला पशु तस्करी का सबसे संवेदनशील ट्रांजिट कॉरिडोर बनकर उभरा था। सीमावर्ती जिले और बिहार को जोड़ने वाले अंतरजनपदीय मार्गों का फायदा उठाकर संगठित गिरोह बड़े पैमाने पर पशुओं की तस्करी कर रहे थे।
हालांकि पुलिस की सख्त कार्रवाई से तस्करों के नेटवर्क को करारा झटका लगा है। एक साल में 112 तस्कर गिरफ्तार, 12 गैंग पंजीकृत हुए, 220 गोवंश मुक्त कराए गए।
वर्ष 2025 में जिले में कुल 15 पुलिस मुठभेड़ हुईं, जिनमें 20 से अधिक गो-तस्कर घायल हुए और गिरफ्तार किए गए। अभियान के दौरान पुलिस को कई बार गंभीर प्रतिरोध झेलना पड़ा, यहां तक कि तस्करों ने पुलिस टीमों पर हमला करने की कोशिश भी की, लेकिन रणनीतिक घेराबंदी से हालात काबू में रखे गए।
पुलिस अधीक्षक डॉ.ईरज राजा ने बताया कि जिले के रास्ते बिहार, पूर्वांचल और अन्य राज्यों में पशु तस्करी की जा रही थी। इसे रोकने के लिए जिले में 100 से अधिक बैरियर लगाए गए हैं और सीसीटीवी कैमरों की मदद से ट्रांजिट रूट पर निगरानी बढ़ाई गई है। इसका असर यह रहा कि कई संगठित गिरोहों की कमर टूट गई।