गाजीपुर। गो माता केवल पशु नहीं, सनातन संस्कृति की आत्मा हैं, जिस गो माता को सनातन संस्कृति में माता का स्थान प्राप्त है, आज उसी गो माता की हत्या हो रही है। हमारा वोट लेकर हमारी ही गो माता को काटने का कार्य किया जा रहा है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, धर्म और आस्था की आत्मा है, जो जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दल वास्तविक रूप से गो संरक्षण के लिए कार्य करेंगे, वही समाज और संतों के आशीर्वाद के अधिकारी होंगे। उक्त बातें शनिवार को शहर के लंका मैदान पहुंचे ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहीं।
शंकराचार्य बीते तीन मई से गोविष्टि यात्रा (गो-रक्षा धर्मयुद्ध यात्रा) की यात्रा पर हैं। इसी क्रम में उनकी यात्रा सदर विधानसभा क्षेत्र के रामलीला लंका मैदान पर पहुंची। जहां संत समाज, विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों तथा श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया।
शंकराचार्य ने कहा कि गो माता भारतीय जीवन दर्शन का केंद्र रही हैं। वेदों, पुराणों एवं सनातन परंपरा में गो सेवा को पुण्य और गो रक्षा को धर्म बताया है। कहा कि केवल मंचों से घोषणाएं करने से गोरक्षा नहीं होगी, बल्कि ठोस इच्छाशक्ति एवं कठोर कानून की आवश्यकता है। देश के विभिन्न राज्यों के राजनीतिक एवं सामाजिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाताओं को जागरूक होना होगा और ऐसे नेतृत्व का समर्थन करना होगा जो सनातन मूल्यों एवं गो संरक्षण के प्रति निष्ठावान हो।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि सनातन चेतना को जागृत करने का आध्यात्मिक अभियान है। यह यात्रा उत्तर प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचेगी और समाज को धर्म, संस्कृति एवं गौ सेवा के महत्व से जोड़ने का कार्य करेगी। अंत में शंकराचार्य ने उपस्थित लोगों को गो सेवा, गो संरक्षण एवं सनातन संस्कृति की रक्षा के संकल्प लेने का आह्वान किया। इस मौके पर हर्ष मिश्रा, लक्ष्मीमणी शास्त्री, राघवेंद्र पाठक, ब्रजभूषण दुबे, सुनील राम, मुनन यादव, अजय कुमार श्रीवास्तव, संदीप विश्वकर्मा, शशांक उपाध्याय, रविकांत राय आदि मौजूद रहे।