स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व सांसद सरजू पांडेय की कर्मभूमि जहूराबाद विधानसभा क्षेत्र हर चुनाव में किसी न किसी मुद्दे को लेकर चर्चा में रहता है। इस बार यहां से बसपा से शादाब फातिमा, सुभासपा से ओम प्रकाश राजभर और भाजपा से कालीचरण राजभर मैदान में हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में ओमप्रकाश राजभर इस क्षेत्र से विधायक बने उस समय वे भाजपा गठबंधन से यहां से जीते थे और पहली बार में ही कैबिनेट मंत्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ था। उनका मुकाबला बसपा के कालीचरण चरण राजभर से हुआ था। जिनसे 18081 वोट के अंतर से जीत दर्ज की थी।
ओमप्रकाश राजभर का भाजपा के साथ ज्यादा दिन तक संबंध नहीं रहा और एक वर्ष बाद ही उनकी भाजपा से दूरियां बढ़ती गईं और गठबंधन से अलग हो गए। इस चुनाव में ओमप्रकाश राजभर समाजवादी पार्टी के गठबंधन के साथ फिर दूसरी बार किस्मत आजमा रहे हैं। उनके सामने बसपा की प्रत्याशी शादाब फातिमा हैं। जो 2007 में सदर और 2012 में जहूराबाद से विधायक रह चुकी हैं। उनके द्वारा क्षेत्र में कराए गए कार्यों के आधार पर सवर्णों का समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो बसपा के परंपरागत अनुसूचित जाति के वोट के साथ मुस्लिम वोट मिलने पर उनकी दावेदारी मजबूत दिख रही है। वहीं, भाजपा के प्रत्याशी कालीचरण राजभर भी 2002 और 2007 में जहूराबाद से विधायक रहे हैं। जिनका राजभर और दलित वोटों पर प्रभाव रहा है। ऐसे में जहूराबाद की लड़ाई त्रिकोणीय हो गई है।
इस सीट पर ओम प्रकाश राजभर को राजभर, यादव और मुस्लिम वोटों के साथ चौहान वोटों की दरकार है। जबकि शादाब को सवर्ण और मुस्लिम वोटों में घुसपैठ करने की आस है। कालीचरण राजभर अपने जातिगत राजभर और व्यक्तिगत अनुसूचित जाति के वोटों को बटोरने के लिए प्रयासरत हैं। इन वोटों का साथ जाना या नहीं जाना ही तीनों प्रत्याशियों का भविष्य तय करेगा। जहूराबाद सीट पर भारतीय जनता पार्टी को सिर्फ एक बार 1996 में गणेश राजभर के सहारे जीत मिली है। इसी तरह समाजवादी पार्टी को 2012 में पहली बार शादाब फातिमा ने जीत दिलाई थी। बसपा यहां पर तीन बार परचम लहराने में कामयाब रही है। कांग्रेस ने यहां पर सबसे अधिक पांच बार जीत हासिल की है।
कमजोरी और मजबूती
पिछली बार इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने महेंद्र चौहान को मैदान में उतारा था। महेंद्र चौहान को 64574 मत मिले थे और तीसरे स्थान पर रहे। इस बार महेंद्र चौहान बलिया के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से सुभासपा के उम्मीदवार हैं। जो ओम प्रकाश राजभर की मजबूत कड़ी हैं, लेकिन पिछली बार भाजपा के साथ होने से सवर्णों का जो वोट मिला था वो कट गया है। साथ ही पांच साल क्षेत्र में कम गतिविधि रहने के साथ जमीनी काम न करना उनकी कमजोरी है। वहीं पिछले एक वर्ष में बसपा के बाद सपा और उसके बाद भाजपा में शामिल होने वाले भाजपा उम्मीदवार कालीचरण राजभर को राजभर मतदाताओं से ही संघर्ष करना पड़ रहा है। अगर उनका ये संघर्ष खत्म होता है तो भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। क्योंकि उनके साथ सवर्ण और कुछ अनुसूचित वोट जुड़ने के आसार हैं। बसपा उम्मीदवार शादाब फातिमा की अनुसूचित जाति और मुस्लिम समीकरणों के अलावा पिछड़े और सवर्ण मतदाताओं में व्यक्तिगत जुड़ाव की मजबूती है।
2017 का चुनाव परिणाम
ओमप्रकाश राजभर- सुभासपा-भाजपा 86583
कालीचरण राजभर- बसपा 68502
महेन्द्र चौहान-सपा 64574
जातिगत समीकरण
राजभर- 66 हजार
अनुसूचित जाति-75 हजार
यादव- 40 हजार
चौहान 18 हजार
मुस्लिम 30 हजार
वैश्य 15 हजार
ब्राह्मण 14 हजार
भूमिहार 12 हजार
कुशवाहा 12 हजार
कुल मतदाता- 404682
पुरुष- 215828
महिला- 188840