पकड़ी गांव निवासी राजेश यादव हत्याकांड का मामला शांत होने का नाम नहीं ले
रहा है। मंगलवार को युवा छात्र मोर्चा की ओर से सरजू पांडेय पार्क में
धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। मोर्चा की तरफ से लिखित शपथ पत्र देकर
प्रशासन से प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन उन्हें इसकी
अनुमति नहीं मिल सकी।
यही नहीं प्रदर्शन स्थल पर लगी टेंट व कुर्सियों आदि
को पुलिस प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया। इस बात की जानकारी होने पर
मोर्चा के संयोजक देवेंद्र यादव ने सदस्यों के साथ बैठक कर शांतिप्रिय ढ़ंग
से मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया।
इसके बाद उपजिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में जिले
में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं को रोकने में नाकाम रहने पर पुलिस अधीक्षक को
हटाने की मांग की गई है। इसके अलावा राजेश यादव हत्याकांड की जांच सीबीआई
से कराने तथा हास्पिटल का लाइसेंस रद्द कर आरोपी चिकित्सक दंपती को
गिरफ्तार करने एवं फर्जी मुकदमे में फंसाए गए निर्दोष छात्रों को रिहा कर
उनके खिलाफ दर्ज झूठे मुकदमे वापस लेने की मांग शामिल हैं।
इसके अलावा मृतक
राजेश के परिवार को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराने की भी
मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने वालों में संयोजक देवेंद्र यादव के अलावा
भानू, प्यारेलाल यादव, पांचू, सुनील आदि मौजूद थे।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
राजेश यादव हत्याकांड के आरोपी डाक्टर दंपती एवं अन्य तीन लोगों की
गिरफ्तारी ने होने पर ग्रामीणों ने आक्रोश व्याप्त करते हुए वरिष्ठ
अधिवक्ता जयनारायण राय के नेतृत्व में रेवतीपुर के रामलीला मैदान में
मंगलवार को बैठक की। अधिवक्ता ने अपने संबोधन में कहा कि जिस तरह जिला
प्रशासन ने दबाव में हत्याकांड के मुख्य आरोपी डाक्टर दंपती को क्लीन चिट
दी है, वह शर्मनाक है। उन्होंने कहा जिले एवं प्रदेश में अगर अपराधियों पर
नकेल नहीं कसी गई तो आम लोगों का जीना मुहाल हो जाएगा। पुलिस प्रशासन
तानाशाही रवैया अपना रही है।
घटनाओं की लीपापोती पर आईपीएफ ने चढ़ाई आस्तीन
इंडियन पीपुल्स फ्रंट (आईपीएफ) के कार्यकर्ताओं की बैठक मंगलवार को पार्टी
के स्थानीय कार्यालय पर हुई। इसमें राजेश यादव हत्याकांड के मुख्य
अभियुक्त एवं अन्य की गिरफ्तारी न करने तथा मनोज सिंह लूट और हत्याकांड आदि
घटनाओं का खुलासा न करने पर रोष व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन
घटनाओं की लीपापोती कर पुलिस ने कानून राज को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
इसको लेकर 7 मई को जिला मुख्यालय पर धरना देकर सभा करने का निर्णय लिया
गया।