गाजीपुर। नूरपुर कांड में पुलिसिया क्रूरता की कहानी परत दर परत खुलनी शुरू हो गई। करीब एक सप्ताह पूर्व पुलिस ने तमंचा और हथियार लहराते जिस आरोपी को दबोचा था, वह सिपाही को दांत से काटकर फरार हो गया था। अपनी नाकामी छिपाने के लिए पुलिस ने ऐसी कहानी रची कि एक ब्राह्मण परिवार के नौ सदस्यों पर ही उसे भगाने का आरोप मढ़ डाला। इसके बाद उसने जो पुलिसिया बर्बरता दिखाई, उसे लेकर शासन से प्रशासन तक की पेशानी पर बल पड़ गया है।
कश्मीर के उरी सेक्टर में तैनात कमल पांडेय ने बताया कि तमंचा लहराने वाले आरोपी राजन पांडेय उर्फ झनकू से कई वर्षों से उनका पैतृक विवाद चल रहा है। उसके परिवार से कोई मतलब ही नहीं है। कुछ पुलिस कर्मी राजन को पकड़कर पैदल ले जा रहे थे। इधर, सादे वेश में पहुंचे कुछ पुलिसकर्मी घर में घुसे और उसे छिपाने का आरोप लगाते हुए तोड़फोड़ करने लगे। इसी बात को लेकर कहासुनी होने के साथ शोर होने लगा। आवाज सुनकर पैदल लेकर जा रहे आरोपी को एक सिपाही के भरोसे छोड़कर अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए। इसी बीच आरोपी सिपाही के हाथ को दांत से काटकर फरार हो गया। जब पुलिस को यह पता चल कि आरोपी फरार हो गया है, तब उन्होंने कहानी रची और परिवार के नौ सदस्यों को डेढ़ घंटे बाद थाने बुलाकर अपनी बर्बरता और क्रूरता का परिचय इस कदर दिया कि पीड़ितों के शरीर पर उभरे जख्म को देख कोई भी सिहर उठे। पीड़ित सेना के जवान ने बताया कि जहां सादे वेष में पुलिस कर्मियों से बिना वजह घर में घुसने को लेकर कहासुनी हो रही थी, वहां से 150 मीटर दूर पुलिस का वाहन खड़ा था। जबकि पुलिस ने राजन पांडेय को छुड़ाने का आरोप लगाया। अपनी नाकामी छिपाने के लिए नगसर पुलिस ने ऐसी कहानी बनाई, जिसमें सभी फंस जाएं। जांच में ही पूरा मामला साफ हो जाएगा।