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जांच आज, इलाज कल : रिपोर्ट के इंतजार में अटक रहा उपचार

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शहर के गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज के वेटिंग एरिया में बैठे मरीज व तीमारदार। संवाद
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मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जांच रिपोर्ट में देरी मरीजों के उपचार में बाधा बन रही है। गोराबाजार और मिश्रबाजार स्थित अस्पतालों में रोजाना 450 से अधिक मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए अगले दिन फिर अस्पताल आना पड़ रहा है। रिपोर्ट मिलने तक कई डॉक्टर ओपीडी से जा चुके होते हैं, जिससे मरीजों को दोबारा कतार में लगकर डॉक्टर को रिपोर्ट दिखानी पड़ती है। गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रतिदिन करीब 3,200 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें लगभग 800 मरीजों की ब्लड व यूरिन जांच, 600 के एक्स-रे, 80 के अल्ट्रासाउंड, 100 के सीटी स्कैन और एक दर्जन से अधिक मरीजों की एमआरआई जांच होती है। सुबह आठ बजे से मरीज डॉक्टर को दिखाने के लिए कतार में लगते हैं। जांच लिखे जाने के बाद दोपहर में कराई गई कई जांचों की रिपोर्ट उसी दिन नहीं मिल पाती। ऐसे में मरीजों को अगले दिन रिपोर्ट लेकर फिर अस्पताल आना पड़ता है। इससे सबसे अधिक परेशानी दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को हो रही है। कई मरीज निजी वाहन या अन्य साधनों से अस्पताल पहुंचते हैं। रिपोर्ट के लिए अगले दिन दोबारा आने पर उन्हें अतिरिक्त किराया, भोजन और एक दिन की मजदूरी का नुकसान उठाना पड़ता है। इसके बाद रिपोर्ट दिखाने के लिए फिर कतार में लगना पड़ता है।
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महिला अस्पताल में लैब नहीं, सैंपल भेजने से बढ़ रही देरी
मिश्रबाजार स्थित महिला अस्पताल में ब्लड जांच की लैब नहीं है। यहां लिए गए रक्त के नमूने जांच के लिए गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज की लैब भेजे जाते हैं। इससे रिपोर्ट मिलने में अतिरिक्त समय लग रहा है। समय बचाने के लिए कुछ तीमारदार खुद ही सैंपल लेकर गोराबाजार लैब पहुंच रहे हैं। करीमुद्दीनपुर निवासी गोपाल ने बताया कि नवजात की ब्लड जांच महिला अस्पताल में लिखी गई थी। रिपोर्ट जल्दी मिलने की उम्मीद में वह सैंपल लेकर सीधे गोराबाजार लैब पहुंचा। करीब साढ़े तीन घंटे बाद रिपोर्ट मिली, जिसके बाद डॉक्टर को दिखा सका।


प्रतिक्रिया
भाभी के सिर दर्द पर डॉक्टर ने सीटी स्कैन लिखा था। जांच बुधवार को हो गई, लेकिन रिपोर्ट गुरुवार को मिली। तब तक डॉक्टर जा चुके थे। अगले दिन फिर अस्पताल आना पड़ा। - शाह आलम, करंडा
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बेटे को दस्त और पेट दर्द था। ब्लड जांच के बाद रिपोर्ट अगले दिन मिली। इसके बाद डॉक्टर को दिखा पाए। इलाज में एक दिन की देरी हो गई। - कमला यादव, जैतपुरा
सुबह डॉक्टर को दिखाया था। एक्स-रे और रिपोर्ट लेने में दोपहर ढाई बज गए। आर्थोपेडिक ओपीडी पहुंचे तो डॉक्टर जा चुके थे। अगले दिन फिर आना पड़ा। - अमरनाथ यादव, नूरपुर

बढ़ रहा आर्थिक बोझ
जांच रिपोर्ट के लिए अगले दिन अस्पताल आने से ग्रामीण मरीजों को अतिरिक्त किराया और भोजन पर खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, रोज कमाकर खाने वाले लोगों को एक दिन की मजदूरी का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों के लिए रिपोर्ट में देरी उपचार को भी प्रभावित कर रही है।
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वर्जन
खून की जांच रिपोर्ट आने में चार-पांच घंटे लगते हैं। मरीज रिपोर्ट मिलने के बाद किसी अन्य डॉक्टर को भी दिखा सकते हैं। सीटी स्कैन की रिपोर्ट पांच-छह घंटे में मिल जाती है, जबकि एमआरआई की रिपोर्ट आने में करीब 24 घंटे लगते हैं।
- प्रो. आनंद मिश्रा, प्रधानाचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज।
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