सोकनी गांव के पास हो रहा गंगा में कटान।
करंडा विकास खंड के सोकनी, बड़हरिया, रफीपुर और बयेपुर में पिछले कई दिनों से कटान का सिलसिला जारी है। पिछले दो दिनों में दस बिस्वा भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई है। कटान का क्रम न रुकने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। वह आंखों में आंसू लिए अपनी भूमि को काटकर गंगा में गिरते देखने को विवश हैं। बड़हरिया के आधा दर्जन मकान भी कटान के निशाने पर है। इससे इन मकानों में रहने वाले लोग भयवश चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं।
क्षेत्र में कटान का होना कोई नई बात नहीं है। गंगा किनारे के कई गांव के लोग वर्षों से कटान का दंश झेल रहे हैं। पुरैना गांव में वर्षों गंगा कटान का कहर बना रहा है। इस दौरान सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि, शिव मंदिर, दर्जनों विशालकाय पेड़ सहित करीब दो दर्जन लोगों का मकान गंगा कटान की भेंट चढ़ गए।
कटान से बेघर हुए लोगों को प्रशासन ने कई वर्षों तक स्कूल में शरण दिया था। बाद में उन्हें भूमि आवंटित की गई। प्रशासन ने प्रयास कर पुरैना में 600 मीटर बोल्डर पीचिंग और पार्कों पाईन लगाकर लोगों को कटान के कहर से बचा लिया। लेकिन सोकनी, बड़हरिया, रफीपुर और बयेपुर में तेजी से कटान का कहर जारी है। दो दिन में दस बिस्वा भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई।
गंगा भूमि को काटते हुए हुए तेजी से बड़हरिया के देवनारायन यादव, तेज नारायन यादव, कपिलदेव, शिव गोविंद, कमला और बसगित के मकान की तरफ बढ़ रही है। इससे मकानों में रहने वाले लोग भयभीत है। रात में सोते समय कही कटान की रफ्तार में वृद्धि होते हुए उनके मकान इसकी जद में न आए, इस आशंका से लोग चैन की नींद सो रहे हैं।
पीड़ित अपनी आंखों के सामने ही अपनी भूमि को कटकर गंगा में गिरते हुए देखने को विवश हैं। कटान पीड़ितों ने कहा कि कटान रोकने के नाम पर सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि कटान का जायजा लेकर चले जा रहे हैं। उनकी तरफ से कटान को रोकने का कोई ठोस उपाय नहीं किया जा रहा है, जिससे हम लोग अपनी भूमि को कटकर गंगा में गिरते हुए देखते को विवश हैं।