फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहली बारिश में ही पानी में डूबा तहसील परिसर

विज्ञापन
विज्ञापन
कासिमाबाद तहसील परिसर बुधवार को हुई सीजन की पहली बरसात के पानी से पूरी तरह लबालब भर गया। वहीं इसे निकालने के लिए अधिकारियों में कोई जागरूकता नहीं दिख रही है। तहसील के अधिवक्ताओं के साथ आम जनता ने परिसर में भरे पानी पर आक्रोश व्यक्त करते हुए इस पानी को शीघ्र निकलवाने की मांग किया है।
विज्ञापन

मालूम हो कि कासिमाबाद तहसील स्थापना के समय से ही दुर्व्यवस्था की शिकार है। इस तहसील का मुख्य भवन का निर्माण अभी तक नहीं हुआ है। पूरा तहसील पुराने भवनों में संचालित है। झमाझम बरसात से तहसील का पूरा प्रांगण पानी से भरा पड़ा है। गुरुवार की शाम तक तहसील प्रांगण से पानी निकलवाने की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। जैसे ही फरियादी और अधिवक्ता तहसील प्रांगण में सुबह आए हैं उन्हें पानी से दो-चार होना पड़ा है। प्रांगण में पानी भरने से तहसील के अधिवक्ताओं का बैठने वाला शेड कार्यालय से कट गया है। पानी भरने से अधिवक्ताओं ने न्यायालयों का बहिष्कार कर चेतावनी भी दे डाली है। अधिवक्ताओं के साथ वादकारियों ने जिले के उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराकर इस समस्या का समाधान कराने की मांग की है।
कासिमाबाद तहसील दुर्व्यस्थाओं का शिकार है। यहां पर पीने का पानी की भी व्यवस्था नहीं है। वाटर कूलर वर्षों से खराब है। सीजन की पहली बरसात से पूरा प्रांगण पानी से भरा हुआ है। किससे कहा जाए। इस तहसील का भगवान ही मालिक है। - अनिल कुमार राय, अधिवक्ता
विज्ञापन

तहसील प्रांगण में पानी भरने से अधिवक्ताओं को अपने चेंबर से निकलकर कार्यालय आने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं वादकारियों को भी बार-बार कार्यालय और अधिवक्ताओं के पास जाने आने से उनमें काफी गुस्सा है। पानी निकासी की तत्काल व्यवस्था होनी चाहिए।- राजेश कुमार गौतम, अधिवक्ता
कासिमाबाद तहसील जिले की चर्चित तहसील हो गई है। यहां पर जनता अपने काम से आती है लेकिन समस्याओं का समाधान कराना बहुत मुश्किल हो गया है। मैं अपने एक मुकदमे के लिए एक साल से दौड़ रहा हूं। प्रांगण में पानी भरने से अपने अधिवक्ता को बुलाने के लिए मुझे काफी जहमत झेलनी पड़ी है।- रविंद्र राम, डोड़सर
तहसील में शासन का कोई कंट्रोल नहीं दिखाई देता है। इतनी मनमानी किसी तहसील में नहीं है। एक दिन की बरसात से पूरा तहसील प्रांगण पानी से भर गया। अधिकारी गाड़ी से आते हैं जाते हैं , लेकिन आम जनता को इस पानी में चल कर अपना काम कराना पड़ रहा है। - श्रवण राम, धरवार कला
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें