गाजीपुर। करंडा थाना क्षेत्र के कटरिया गांव में 15 अप्रैल को किशोरी निशा विश्वकर्मा की मौत और 22 अप्रैल को सपा के प्रतिनिधि मंडल व ग्रामीणों के बीच हुए पथराव के एक सप्ताह बाद भी हालात तनावपूर्ण हैं। हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। बिना पहचान पत्र दिखाए गांव में किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। गांव की गलियाें में सन्नाटा पसरा है। इधर, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का किशोरी के परिजनों से मिलने का कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
मंगलवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निजी सचिव गंगाराम की ओर से पत्र जारी किया गया है। इसकी पुष्टि सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव ने की है। वहीं, दिन में करीब 11 बजे समाजवादी पार्टी का 4 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचा और पंचायत भवन में करीब दस मिनट तक किशोरी के परिजनों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने परिजनों को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। परिजनों से घटना की जानकारी ली गई।
पूर्व मंत्री रामाश्रय विश्वकर्मा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में सदर विधायक जै किशन साहू, सपा महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा राजभर और रीता विश्वकर्मा शामिल रहीं। प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। इस दौरान डीआईजी वाराणसी परिक्षेत्र वैभव कृष्ण, जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला और एसपी डॉ. ईरज राजा पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। गांव में तीन कंपनी पीएसी, 100 से अधिक पुलिसकर्मी, 10 इंस्पेक्टर और दो क्षेत्राधिकारी तैनात किए गए हैं। चंदौली, वाराणसी और जौनपुर से भी पुलिस मंगाकर तैनात किया गया है।
अफवाहों पर न दें ध्यान : डीआईजी
पुलिस उप महानिरीक्षक वाराणसी परिक्षेत्र वैभव कृष्ण ने वीडियो संदेश जारी कर लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जा रही है। आमजन केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें। उन्होंने कहा कि गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
पूर्व मंत्री बोले-पोस्टमार्टम के बाद न विसरा सुरक्षित रखा और न कराई सीमेन की जांच
गाजीपुर। किशोरी के परिजनों से मुलाकात के बाद समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। सपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत में पूर्व मंत्री रामाश्रय विश्वकर्मा ने कहा कि मुलाकात के दौरान परिजनों ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे। आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम के दौरान विसरा सुरक्षित नहीं किया गया। सीमेन की भी जांच नहीं कराई गई, जिससे दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हो सकी। इन बिंदुओं को प्रतिनिधिमंडल ने डीआईजी वैभव कृष्ण और जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के समक्ष रखा, जिस पर अधिकारियों ने आवश्यक जांच कराने का आश्वासन दिया है। रामाश्रय विश्वकर्मा ने कहा कि जब तक सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का कार्यक्रम प्रस्तावित नहीं हुआ था, तब तक प्रशासन मामले को दबाने में लगा था लेकिन कार्यक्रम तय होते ही सरकार सक्रिय हुई और पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराई गई। पूर्व मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार ने चार लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी की मांग की थी लेकिन पुलिस ने सिर्फ दो लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। दो के नाम हटा दिए। केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि दूसरा पुलिस की पकड़ से दूर है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल अपनी पूरी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपेगा और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग जारी रखेगा। इस अवसर पर सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव, सपा महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा राजभर के अलावा सदर विधायक जै किशन साहू और रीता विश्वकर्मा मौजूद रहीं।
ग्राम प्रधान को रखा गया नजरबंद
गाजीपुर। सपा के प्रतिनिधिमंडल के कटरिया गांव पहुंचने के दौरान पुलिस ने ग्राम प्रधान आशुतोष सिंह आशु समेत भाजपा के कई स्थानीय नेताओं को सोमवार रात से ही एहतियातन नजरबंद बंद कर दिया था। भाजपा के मंडल अध्यक्ष शशिकांत गिरी ने बताया कि उन्हें पहले थाने से फोन आया कि आपको घर से कहीं निकलना नहीं है। इसके बाद पुलिस कर्मी घर के बाहर तैनात कर दिए गए। इसी प्रकार ग्राम प्रधान आशुतोष सिंह आशु को शहर के शास्त्री नगर स्थित उनके आवास पर नजरबंद कर दिया। मंगलवार को दिनभर उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया। संवाद
ब्राह्मण रक्षा दल के संयोजक को किया नजरबंद
गाजीपुर। ब्राह्मण रक्षा दल के संयोजक प्रेम मिश्र को मंगलवार सुबह पुलिस ने उनके आवास पर नजरबंद कर दिया। यह जानकारी स्वयं प्रेम मिश्रा ने मोबाइल फोन पर दी। बताया कि कासिमाबाद कोतवाल राजनारायन और बरेसर थाना प्रभारी डीके सोनकर ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर उनको नजर बंद कर दिया। ब्राह्मण रक्षा दल का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को कटारिया गांव जाने वाला था। प्रतिनिधिमंडल को हरिओम और निशा विश्वकर्मा के परिजनों से मुलाकात करनी थी। पुलिस अधीक्षक से मिलकर हरिओम, अभिषेक समेत अन्य के लिए न्याय की मांग की योजना थी।