सोमवार को पूरे दिन कोहरे की चादर तनी रही। पारा लुढ़क कर नौ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसके चलते कंपकंपी का एहसास भी शुरू हो गया है। मौसम में आए इस परिवर्तन की वजह से जनजीवन प्रभावित हुआ है।
सोमवार को बाजार और दफ्तर खुले होने के बावजूद सड़कों पर भीड़ कम दिखी। दृश्यता कम होने के कारण यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा है।
हफ्ते भर से मौसम अस्थिर बना हुआ है। कभी धूप तो कभी बादलों का सिलसिला जारी है। दो दिनों से पारे में भी गिरावट का सिलसिला भी चल रहा है। सोमवार को भोर में पारा नौ डिग्री सेल्सियस के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया।
इससे कंपकंपी का एहसास शुरू हो गया है। दिन भर लोग चादर और गर्म कपड़ों में सिमटे नजर आए। भोर में घना कोहरा छाया रहा। दिन में कोहरा छंटा भी तो लेकिन उसकी चादर पूरी तरह नहीं हटी। सूरज कोहरे की चादर में ही
सोया रहा। अचानक शुरू हुई इस ठंडे से बचाव के उपाय अभी नहीं किए गए हैं। प्रशासन कंबल बांटने के लिए जितनी तत्परता दिखा रहा लेकिन उसे लागू करने में उसकी सुस्ती के चलते अभी किसी को कंबल नहीं मिल पाए हैं। नगर
पालिका की ओर से अलाव का भी कहीं बंदोबस्त नहीं किया गया है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक आने वाले दिनों में सर्दी बढ़ती जाएगी लेकिन उसका सामना करने के लिए प्रशासन ने अभी कोई बंदोबस्त नहीं किया है। अफसरों का सारा जोर पंचायत चुनाव कराने पर ही है।
लोग अपने स्तर से अलाव जलवा रहे हैं। ठंड का सबसे ज्यादा असर यातायात व्यवस्था पड़ा है। सड़क पर वाहन रेंगते नजर आए। दृश्यत कम होने के कारण बसों और ट्रेनों का परिचालन बेतरह प्रभावित हुआ है। चिकित्सकों का कहना है
कि ऐसे मौसम में बुजुर्गों और बच्चों के साथ खास एहतियात बरतना चाहिए। भोर में टहलने से बचना चाहिए और बाहर निकलें तो सिर जरूर ढंकें।