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किसी ने बुलाए घरवाले तो कोई चल पड़ा पैदल

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सुबह से ही यात्री वाहन संचालन की बाट जोहते दिखाई पड़े। कभी एक स्टैंड तो कभी किसी सवारी वाहनों को देख सड़क के तरफ दौड़ पड़ते थे, लेकिन मायूसी ही हाथ लग रही थी। किसी को वाराणसी, सैदपुर, प्रयागराज तो किसी को दूर की यात्रा के लिए ट्रेन और बस अन्य जनपदों से पकड़ने की चिंता सता रही थी। सुबह 6 बजे से कोई परिवार के साथ स्टैंड के पास स्थित दुकानों पर बैठकर वाहनों के आवागमन शुरू होने का इंतजार करते दिखाई पड़ रहे थे। इधर गैर प्रांतों से लंबी दूरी तय कर सिटी रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले यात्री स्टेशन परिसर में संसाधन नहीं होने पर चिलचिलाती धूप में ही पैदल आवागमन करने को विवश दिखाई पड़े। वहीं सुरक्षा दृष्टिकोण से तैनात पुलिस कर्मियों, अधिकारियों एवं बैरिकेडिंग जैसी सतर्कता को देख जल्द से जल्द घर पहुंचने के लिए परेशान थे।
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अग्निपथ योजना का विरोध और बवाल के साथ भारत बंद के आह्वान को देखते हुए सरकारी और निजी बसों का संचालन पूरी तरह बंद था। वहीं कई दिनों से पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेन भी निरस्त चल रही है। वहीं इन सब बातों से अंजान यात्री सुबह घर से निकले और गतंव्य तक पहुंचने के लिए रोडवेज पहुंचे। वहां बसों का संचालन न होने से निजी बस स्टैंडों पर पहुंचे तो पता चला कि वाराणसी, बलिया, रसड़ा और मऊ जाने के लिए कोई संसाधन नहीं है। यहीं नहीं जिले में भी आवागमन करने के लिए सवारी वाहनों का संचालन न होने से आटो और अन्य छोटे वाहन चालकों को अधिक धनराशि का भुगतान कर आवागमन करते दिखाई पड़े। सबसे अधिक परेशानी का सामना परिवार के साथ आवागमन करने वाले लोगों को उठानी पड़ी। उनके समझ में ही नहीं आ रहा था कि वह कैसे आगे का सफर शुरू करें। उनकी निगाहें सवारी वाहनों के आने पर रुक जाती थी। काफी देर इंतजार करने के बाद कुछ यात्री परिजनों को बुलाकर अपने निजी साधनों से घर वापस हो गए। सुबह से लेकर शाम तीन बजे तक लोग आवागमन के लिए परेशान दिखाई पड़े। तीन बजे के बाद जनपद का बार्डर खुलने के बाद वाहनों का जहां आवागमन शुरू हुआ तो राहत की सांस ली।
वाराणसी जाने के लिए किसी तरह तो लंका बस स्टैंड पहुंचा। करीब चार घंटे हो गए, लेकिन यहां से बस का संचालन कब होगा। इसको लेकर कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है। अब समझ में नहीं आ रहा है, क्या किया जाए।- शिव जोगी शर्मा, दिलदारनगर।
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मध्यप्रदेश की बस वाराणसी से पकड़नी है। एक शाम में चार बजे तो शाम सात बजे हैं। यहां ही दो बज चुका है। अब लग रहा है कि बस नहीं मिल पाएगी। किसी तरह तो अविसहन से यहां आया हूं, लेकिन यहां भी वाहनों का संचालन ठप है।- बिहारी, अविसहन।
सैदपुर घर जाना है। बिरनो किसी काम से आई थी। वहां से काफी इंतजार करने के बाद तो आटो से रौजा और फिर लंका पहुंची। करीब तीन घंटा हो गया इंतजार करते, लेकिन अब-तक कोई सवारी वाहन नहीं मिल सका है।- लीला देवी, सैदपुर
पीजी कालेज टेरी में बीफार्मा की परीक्षा थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद घर जाने के लिए सीधे लंका बस स्टैंड पर आया, लेकिन बस का संचालन नहीं हो रहा है। ऐसे में अब घर पहुंचने के लिए समस्या खड़ी हो गई है।- आशीष पटेल, प्रयागराज
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