कासिमाबाद। अमर शहीद शशांक सिंह के बलिदान हुए नौ वर्ष हो गए हैं। उनका नौवां बलिदान दिवस क्षेत्र के नसीरुद्दीनपुर गांव में 22 नवंबर को मनाया जाएगा। यह जानकारी उनके पिता अरुण सिंह की ओर से दी गई। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचेंगे। शशांक सिंह कासिमाबाद थाना क्षेत्र के नसीरुद्दीनपुर गांव के मूल निवासी थे। 22 नवंबर वर्ष 2016 को जम्मू कश्मीर के माच्छिल सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की बैट टीम के छिप कर किए गए क्रूरतम एवं कायराना हमले में शशांक अपने दो साथियों के साथ बलिदान हो गए थे। इनमें जिले के बद्धूपुर निवासी मनोज कुशवाहा एवं राजस्थान के प्रभु सिंह भी बलिदान हुए थे। यह तीनों जांबाज सैनिक 19 राजपूत रेजीमेंट में राइफल मैन के पद पर तैनात थे। तीनों सैनिकों के साथ पाकिस्तानी सेना बहुत ही कायराना हमला करते हुए सैनिकों के शव के साथ खिलवाड़ करते हुए अंग-भंग कर दिया था। तीन भाइयों में शशांक के सबसे बड़े भाई हिमांशु सिंह सेना से सेवानिवृत हैं तो दूसरा भाई सुधांशु सिंह बेरोजगारी की हालत में घर पर हैं। अपने लाडले पुत्र को याद करके पिता अरुण कुमार सिंह एवं माता कमलावती देवी की आंखें आज भी भर आती हैं।
वादे नहीं हुए पूरे, ठगा हुआ महसूस कर रहा परिवार-कासिमाबाद। बलिदानी शशांक सिंह के परिजन राजनेताओं द्वारा की किए गए घोषणाओं के अब तक पूरा नहीं होने से काफी ठगा महसूस कर रहे हैं। पिता अरुण कुमार सिंह के अनुसार तत्कालीन महिला कल्याण राज्य मंत्री शादाब फातिमा ने नसीरुद्दीनपुर गांव का नाम शहीद के नाम पर शशांकपुरम करने का भरोसा दिलाया था। इसी प्रकार शहीद की याद में उन्होंने कासिमाबाद से नसीरुद्दीनपुर जाने वाले मार्ग पर मुख्य गेट निर्माण का वादा किया था। आरोप है कि गेट बना दिया गया परंतु भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। कासिमाबाद चौक पर शहीद शशांक सिंह की प्रतिमा लगाने के साथ कासिमाबाद-कठवामोड़ मार्ग का नामकरण शहीद शशांक सिंह के नाम पर करना था। इस कार्य को मुख्यमंत्री ने स्वीकृति प्रदान करते हुए पत्र जिला प्रशासन को आदेश दिया था। तत्कालीन केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने केंद्र सरकार के सहयोग से गैस एजेंसी देने के साथ शहीद के छोटे भाई सुधांशु को केंद्र सरकार की मदद से नौकरी दिलवाने का वादा किया था। जो अब तक पूरा नहीं हुआ।