गांव स्थित एक पैलेस में अखिल भारतीय साहित्यकार सम्मलेन के दौरान शनिवार की रात आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने सम सामयिक विषयों पर रचनाएं सुनाईं। रांची की कवयित्री वीणा श्रीवास्तव ने ‘पाक के लोभी भंवरों को कभी न मंडराने देंगे, कश्मीर तो दूर एक भी फूल नहीं जाने देंगे’ पेश किया तो लोग इसकी तारीफ किए बिना न रह सके।
गीतकार राजकिशोर प्रतापगढ़ी ने ‘गीत बन गुनगुनाती रही जिंदगी, प्रीत सी लहलहाती रही जिंदगी’ सुनाया। दिल्ली से आए कवि संजय गिरी ने ‘वतन पर मर मिटेंगे हम कसम ये आज खाते हैं, लगाकर जान की बाजी तिरंगा हम उठाते हैं’ और शायर दानिश जयपुरी के कलाम ‘छू के जुल्फों से तेरी यादें सहर आती है, तेरे आने की बहारों से खबर आती है’ को लोगों ने काफी सराहा। संजय सजल ने भ्रूण हत्या पर कविता पेश किया। राम गोपाल जोया, सुरेश प्रसाद जशाला, देवनारायण शर्मा, रमा वर्मा, समीर परिमल, डॉ. अक्षय पांडेय, प्यासा अंजुम, आराधना प्रसाद, रेखा जोशी, देवकांत पांडेय, सुनील नवोदित आदि ने अपनी रचनाएं पेश कीं।
कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रदेश के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह रहे। अध्यक्षता नव गीतकार कुमार शैलेंद्र तथा संचालन मिथिलेश गहमरी ने किया। इस अवसर पर मन्नू सिंह, अजित सिंह, हेराम सिंह, भूपेंद्र उपाध्याय आनंद गहमरी, राजेश उपाध्याय, देव उपाध्याय, प्रमोद यादव, सतेंद्र सिंह, प्रशांत सिंह आदि मौजूद रहे। आयोजक अखंड गहमरी ने आभार व्यक्त किया।