राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत छूटे हुए पात्र लाभार्थियों को उनकी पात्रता के अनुसार शामिल करने और अपात्र कार्डधारकों को सूची से हटाने का कार्य किया जा रहा है। इस कवायद के तहत अब तक जिले में 4019 कार्डधारकों ने अपना राशन कार्ड समर्पित कर दिया है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार नगरीय क्षेत्रों में अधिकतम 64.43 प्रतिशत एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम 79.56 प्रतिशत जनसंख्या के अंतर्गत ही पात्र गृहस्थी एवं अंत्योदय राशन कार्ड जारी किया जाएगा। जिले में वर्तमान में कुल छह लाख 36 हजार 850 कार्डधारक हैं। इनमें 59537 अंत्योदय एवं पांच लाख 77 हजार 313 पात्र गृहस्थी के कार्डधारक हैं। शासन को ऐसी सूचना मिल रही है कि कुछ अंत्योदय-पात्र गृहस्थी परिवारों के मुखिया-सदस्य सरकारी नौकरी में चयनित हो गए हैं और उनके परिवार के सभी सदस्यों की वार्षिक आय दो लाख या इससे अधिक हो गई है। यही नहीं उनके परिवार-स्वामित्व में मोटरकार, ट्रैक्टर, 100 गज का प्लॉट या मकान, एसी, हार्वेस्टर, पांच केवी या अधिक क्षमता का जेनरेटर, पांच एकड़ सेे अधिक जमीन के स्वामी, एक से अधिक शस्त्र लाइसेेंस एवं आयकरदाता हैं और उनके परिवार की ओर से इनमें सेे किसी शर्त को पूर्ण किया जा रहा है। जिन परिवारों के सदस्य सरकारी नौकरी में चयनित हैं उनके द्वारा सरकारी नौकरी में कार्यरत व्यक्ति का नाम राशनकार्ड से निकालकर शेष व्यक्तियों का राशनकार्ड जारी कराया गया है, जबकि शासनादेश के अनुसार परिवार के सभी सदस्यों की आर्थिक स्थिति के आधार पर पात्रता एवं अपात्रता का निर्धारण होना है। अंत्योदय अन्न योजना एवं पात्र गृहस्थी के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में प्रचलित वर्तमान राशन कार्डों के शत-प्रतिशत जांच कराने के लिए ग्राम पंचायत सचिव एवं लेखपाल की उचित दर दुकानवार एवं ग्रामसभावार जांच टीम गठित की गई है। अब तक 3054 ने राशनकार्ड समर्पित कर दिया है जबकि नगरीय क्षेत्रों में 32 और ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 933 परिवारों का कार्ड निरस्त किया गया है।
अपात्र परिवार अपना राशन कार्ड तहसील या जिला पूर्ति कार्यालय में समर्पित कर दें। अगर जांच में पाया जाता हैै कि अपात्र परिवार द्वारा अंत्योदय या पात्र गृहस्थी राशनकार्ड जारी कराकर अनुचित लाभ लिया जा रहा है तो ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। जब सेे वह खाद्यान्न लेे रहेे हैं, उसका आंकलन करते हुए नियमानुसार वसूली की कार्रवाई भी की जाएगी। - कुमार निर्मलेंदु, जिला पूर्ति अधिकारी