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क्रोधवंत तब रावन लिहिन्स रथ बैठाई

Sat, 08 Oct 2016 11:31 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
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क्रोधवंत तब रावन लिहिन्स रथ बैठाई
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अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर  से लंका मैदान में शुक्रवार की शाम सुपर्णखा नाक कटईया, खरदूषण वध  एवं सीता हरण की लीला हुई
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प्रभु श्रीराम  पंचवटी में कुटी बनाकर लक्ष्मण, सीता सहित निवास  करते हैं। इसी बीच लंकापति रावण की बहन सूर्र्पणखा वहां आती है। श्रीराम से शादी का प्रस्ताव रखती है। श्रीराम कहते हैं, मेरा तो विवाह हो गया है।

अगर चाहो तो मेरे छोटे भाई लक्ष्मण से शादी कर लो। इतना सुनते ही वह  सुंदर नारी का रूप बनाकर लक्ष्मण के पास जाती है, लेकिन लक्ष्मण शादी से इंकार कर देते हैं। तब वह असली रूप में आ जाती है और  बगल में बैठी सीता की ओर झपटा मारती है। राम के इशारे पर लक्ष्मण सूर्र्पणखा का नाक और कान काट देते हैं। वह अपने भाई खर और दूषण के पास जाती है।
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बहन का नाक, कान कटा देख दोनों भाई बौखला जाते हैं और राम, लक्ष्मण से युद्ध करने लगते हैं। राम और लक्ष्मण खर-दूषण को मार गिराते हैं।  सूर्र्पणखा अपने बड़े भाई   रावण के पास जा पूरी बात बताती है ।  रावण मारीच से बात करता । मारीच स्वर्ण मृग वन  पंचवटी के पास इधर-उधर मंडराने  लगता है। उसे देख सीता मोहित होती हैं । श्रीराम लक्ष्मण को सीता की रखवाली करने की बात कह स्वर्ण मृग के पीछे जाते हैं।
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इतने में हाय लक्ष्मण, हाय सीते की  आवाज सुनाई देती है। इस पर सीता लक्ष्मण से कहती हैं कि आपके बड़े भ्राता किसी संकट में हैं। यह सुन लक्ष्मण रेखा  खींच भाभी से इसके बाहर न जाने की बात कह वह जंगल में चले जाते हैं। उधर साधू का वेश  बना पंचवटी के पास आकर रावण भीक्षा मांगने लगता है। सीता जी का हरण कर लंका ले जाता है।
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