जंगल, पर्वतों को पार करते हुए श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के साथ अत्रि ऋषि के आश्रम में जाते हैं। वहां ऋषि पत्नी अनुसुइया माता सीता को पति धर्म के पालन का उपदेश देती हैं। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से वेदपुरवा स्थित राजा शम्भू नाथ के बाग में शुक्रवार की रात अनुसुइया-सीता संवाद के मंचन का यह दृश्य देखकर लोग भाव विभोर हो गए।
चित्रकूट में अत्रि श्रृषि श्रीराम, लक्ष्मण व सीता को आदर के साथ आसन देकर बैठाते हैं। श्रृषि पत्नी अनुसुइया सीता को आश्रम के अंदर ले गईं। उन्होंने सीता को नारी व्रत धर्म के बारे में समझाया। कहा कि स्त्रियों का व्रत पूजन उनके पति के चरणों में ही रहता है, जो नारी पति व्रत धर्म का पालन सच्चे मन से करती है उनकी देवता भी सराहना करते हैं।
उन्होंने नारी धर्म बताने के बाद सीता को भेंट स्वरूप कुछ गहने आदि प्रदान किए जिसे सीता ने सहर्ष स्वीकार किया।
उधर, सुहवल क्षेत्र के मां दुर्गा पूजा समिति ताड़ीघाट की ओर से रेलवे स्टेशन के मैदान पर श्रीराम जन्म से सीता विवाह तक का मंचन किया गया। गुरु वशिष्ठ के आदेश पर दशरथ सृंगी ऋषि के आश्रम में जाते हैं। सृंगी ऋषि के आदेश पर यज्ञ के बाद दशरथ को राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की प्राप्ति होती है। उधर, जनक पुर में श्रीराम का सीता से विवाह होता है। सीता स्वयंवर देख लोग मुग्ध हो गए ।