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एसआईआर : दूसरे राज्यों से ब्याह कर आईं महिलाओं को मायके का ब्योरा जुटाना बनी चुनौती

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गाजीपुर। दूसरे राज्यों से विवाह कर जिले में आईं हजारों महिलाओं के सामने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सर्वे एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है। निर्वाचन विभाग की ओर से इस बार ऐसे मतदाताओं से मायके पक्ष का विस्तृत विवरण मांगे जाने से महिलाएं खासा परेशान नजर आ रही हैं।
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एसआईआर के तहत बीएलओ द्वारा माता-पिता, नाना-नानी, मायके का पुराना पता, भाग संख्या और वोटर आईडी नंबर जैसे विवरण मांगे जा रहे हैं। शादी के 15–20 साल या उससे अधिक समय बीत जाने के बाद यह जानकारी जुटा पाना कई महिलाओं के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। गैर प्रांतों की रहने वाली महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके मायके वाले क्षेत्रों में फिलहाल एसआईआर की प्रक्रिया नहीं चल रही है। ऐसे में वहां के बीएलओ या निर्वाचन कार्यालय से सत्यापित विवरण प्राप्त करना कठिन हो गया है। कई महिलाएं मोबाइल के माध्यम से जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन समय पर पूरा विवरण नहीं मिल पा रहा
चार लाख से अधिक वोटर संदिग्ध-जिले में एसआईआर के दौरान कुल 4,24,182 मतदाताओं के फाॅर्म संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें 74,414 मृत, 99,963 अनुपस्थित, जबकि 2,49,805 मतदाताओं के आवश्यक प्रपत्र उपलब्ध नहीं हो सके। इनमें महिला और पुरुष दोनों मतदाता शामिल हैं।
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बिहार के बक्सर की रहने वाली नीतू राय का विवाह भांवरकोल ब्लॉक के सुखडेहरा गांव में हुआ है। वर्षों से यहीं रह रहीं नीतू नियमित मतदान करतीं आई हैं, लेकिन इस बार बीएलओ ऑनलाइन आवेदन के लिए मायके का पूरा ब्योरा मांग रहे हैं। उनका कहना है कि समय से जानकारी जुटाना चुनौती बनी है। रेवतीपुर निवासी पूजा राय, जो मूल रूप से बक्सर की हैं और वर्तमान में दिल्ली में रहती हैं, मायके की जानकारी जुटाने में असमर्थ हैं। डुमरांव (बिहार) की पूजा यादव की शादी सैदपुर में हुई है, जबकि मायके वाले अब बंगाल में रहते हैं। इनका कहना है कि वर्षों पुराने विवरण जुटाना आसान नहीं है। बड़ीबाग निवासी सालोनी उपाध्याय और मऊ की ज्वाला, जिनका विवाह जमानिया में हुआ है, उनके मायके पक्ष के लोग अब मुंबई में रह रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि पहले कभी मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए इतने विस्तृत दस्तावेज नहीं मांगे गए थे। वर्षों पुराने पते और वोटर विवरण याद रखना आसान नहीं है।
पुनः सत्यापन के निर्देश-जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने जिले में संदिग्ध पाए गए सभी 4.24 लाख मतदाओं के पुनः सत्यापन के निर्देश दिए हैं। इस कार्य में बीएलओ के साथ लेखपाल, ग्राम पंचायत सचिव और कोटेदारों को भी जोड़ा गया है, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से न कटने पाए।
यदि किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं है या संशोधन की आवश्यकता है तो वे 26 दिसंबर तक एसआईआर अवधि में अपने बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म अवश्य भरें, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रह सके।दिनेश कुमार, एडीएम।
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