मरदह। सावन में एक माह तक गुलजार रहने वाला महाहर धाम इस साल कोरोना महामारी के कारण खामोश है। मंदिर परिसर के बाहर की दुकानें नहीं खुली हैं। आस-पास लगने वाला मेला भी बंद है। इस कारण चारो तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। सोमवार को जलाभिषेक के लिए लाखों कावरिएं हर साल यहां आते थे और दूरदराज से बड़ी संख्या में जो भक्तों का रेला उमड़ता था। इस बार ऐसा कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। शासन प्रशासन के निर्देश मिलते ही जहां कावड़ यात्रा पर रोक लग गई है, वहीं मंदिर के गर्भ गृह में भी ताला लगा दिया गया। कांवरियां बम के लिए स्पेशल बिकने वाला गेरुआ वस्त्र की भी दुकानें बंद हैं। फूल-माला और प्रसाद बेंचने वाले बेकार बैठे हैं। सभी इस बार सावन में जलाभिषेक और दूघाभिषक करने से वंचित हैं। ऐसी स्थिति में घर से ही भगवान शिव की पूजा-अराधना की जा रही है।
ऽआस्थाऽ और ऽविश्वासऽ का केन्द्र महाहर धाम शिव मंदिर क्षेत्र का पौराणिक महत्व वाला धार्मिक स्थल माना जाता है। यह जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर मरदह विकासखंड के सुलेमापुर देवकली गांव स्थित सिद्धपीठ शिवस्थली मानी जाती है। सावन में गंगाजल तथा दूध का अभिषेक किया जाता है। एक माह तक इतनी भीड़ जुटती है कि तिल भी रखने की जगह नहीं मिलती। पूरे क्षेत्र बोल बम और हर हर महादेव के नारे से गूंजता रहता था। शनिवार की रात से ही गाजीपुर गंगा घाटों से भक्त कावरियों का रेला शुरु हो जाता था। सोमवार को दूर- दराज तक सिर्फ गेरूआधारी भक्त ही दिखते थे। इस बार पूरा नजारा बदला हुआ है। मनाही के बावजूद छिटपुट लेग दर्शन के लिए पहुंचते रहे। पहले की अपेक्षा हर ओर सन्नाटा ही पसरा रहा। महाहर धाम मंदिर समिति के राहुल गिरी ने बताया कि मंदिर बंद होने की वजह से भक्तगणों में काफी मायूसी दिख रही है। मंदिर समिति को भी नुकसान होगा।