रात के सन्नाटे में गूंज उठी चीख-पुकार
हर वर्ष की तरह परवल की खेती करने इलाहाबाद जा रहे बलिया के साहनी परिवारों ने दो अक्टूबर को छपरा-बिहार से परवल की लत्ती की खरीद की। इसके बाद मंगलवार की देर शाम इलाहाबाद के लिए रवाना हुए। डीसीएम में महिला, पुरुष, बच्चों सहित कुल करीब तीस लोग सवार थे। डीसीएम की बैरियर से टक्कर होने के बाद रात से सन्नाटे में मृतकों के परिवार के लोगों की रोने की आवाज शांत वातावरण में तैरने लगी। किसी की पत्नी, तो किसी का पति से साथ छूट गया। कई मासूमों के सिर से मां-बाप का साया छिन गया।
बलिया से डीसीएम में सवार महिला-पुरुष मजदूरों और उनके बच्चों को अपनी मंजिल पर पहुंचने का इंतजार था। मंगलवार की रात करीब नौ बजे वह गाजीपुर के रास्ते इलाहाबाद के लिए चले थे। गाजीपुर आते-आते अधिकांश बच्चे नीचे सो गए थे। जबकि अन्य वयस्कों की आंखें भी नींद से झपक रहीं थी। ज्यादातर डीसीएम के भीतर सोए हुए थे, जबकि कुछ डीसीएम के ढाला में ऊपर बैठे थे। इसी बीच रात के करीब 11.30 बजे कठवामोड़ पुल का बैरियर आते ही डीसीएम का ढाला लोहे से टकराया और कईयों की सांसे थम गई।
घटना के बाद रात के सन्नाटे में परिवार वालों की चीख-पुकार मच गई। विमला देवी (50), बेहफी देवी (65), शिवकुमार (45) तथा उसकी पत्नी राधिका देवी (40) ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। जबकि झब्बर की पत्नी चपकेनी देवी (36) की सांसे चल रही थी। सभी अपने घर वालों के शव को पकड़कर दहाड़े मारकर रो रहे थे। उनकी आवाज सुनकर आस-पास के लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों ने घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी। पुलिस घायल पचकेनी देवी को जिला अस्पताल ले आई, लेकिन उपचार के दौरान उसकी भी सांस थम गई। मृत महिलाओं के बच्चे अपनी मां के लिए अस्पताल में बिलख रहे थे। लोग बच्चों और परिवार वालों को सांत्वना दे रहे थे।