गहमर क्षेत्र के भतौरा गांव में सोमवार की रात अलाव से निकली चिनगारी से धनमाती देवी की रिहायशी मड़ई जल गई। गृहस्थी का सभी सामान जलकर राख हो गया। एक भैंस भी गंभीर रूप से झुलस गई। अराजकतत्वों ने सुहवल
गांव में अराजकतत्वों ने खलिहान में आग लगा दी जिससे धान के सैकड़ों बोझ जलकर राख हो गए। भतौरा निवासी धनमाती देवी ने सोमवार की शाम साढ़े सात बजे भैंस के लिए धुआं करने के लिए अलाव जलाई। इसके बाद वह सो
गईं। देर रात अचानक उसकी मड़ई में आग लग गई और ऊंची लपटें उठने लगीं। धनमाती ने किसी तरह अपने बच्चे के साथ भाग कर जान बचाई। आग देख गांव के लोग जुट गए और एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा
लिया। उसकी भैंस भी बुरी तरह से झुलस गई है। धनमाती देवी के पति राजेश राजभर का निधन दस वर्ष पहले हो चुका है। पति के निधन के बाद से वे भैंस पालन करके जीवन-यापन करती हैं। भैंस के झुलसने से उनके सामने
रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। वे खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर हैं। उधर, सुहवल गांव के दक्षिणी तरफ पोखरे के पास खलिहान में सोमवार की आग लगने से धान के सैकडों बोझ जलकर नष्ट हो गए। गांव
की ही पुष्पा देवी पत्नी राधेश्याम गुप्ता मजदूरी करके जीविका चलाती हैं। साथ ही चाय की दूकान चलाती है। वह रोज की तरह दूकान बंद कर घर चली गई थीं। देर रात अगल-बगल के लोगों ने उनके खलिहान धुआं उठते देखा और
पहुंच कर आग बुझाई। खलिहान में साल भर की कमाई नष्ट होते देख पुष्पा अचेत हो गई थीं। उन्होंने गांव के तीन लोगों के खिलाफ तहरीर दी है।