गाजीपुर। पराली और कूड़ा जलाने वालों पर सेटेलाइट से निगरानी हो रही है। एक महीने के अंदर में जनपद में सात स्थानों पर पराली जलाने के मामले प्रकाश में आए हैं। इन मामलों में पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस तरह से कुल 35 हजार रुपये का जुर्माना आग लगाने वाले संबंधित व्यक्तियों पर लगाया गया है। जिले में पराली न जलने पाए, इसे लेकर कृषि व राजस्व विभाग की टीमें गांव-गांव भ्रमण कर रही हैं। जनपद के खेतों पर सेटेलाइट के जरिए पैनी नजर रखी जा रही है। इसकी निगरानी दिल्ली से होती है। सेटेलाइट अक्षांश व देशांतर के जरिए खेतों की निगरानी कर रही है। इसी प्रक्रिया के दौरान एक महीने में पाया गया कि जिले में सात स्थानों पर खेतों में पराली जलाई गई। यह सूचना दिल्ली से प्रदेश की राजधानी लखनऊ भेजी गई। लखनऊ से इस मामले से जिला प्रशासन को अवगत कराया गया। सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। सेटेलाइट रिपोर्ट को जब ग्राउंड स्तर पर खंगाला गया तो पता चला कि सात स्थानों पर पराली जलाई गई है।
पराली जलाने से मृदा को पहुंचता है नुकसान : कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खेतों में पराली जलाने से मृदा को काफी नुकसान पहुंचता है। मिट्टी में मौजूद जरूरी पोषक तत्व नाइट्रोजन व पोटैशियम वाष्पित हो जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा क्षमता कम हो जाती है। साथ ही मृदा का तापमान बढ़ जाता है। इससे मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव व कीड़े मर जाते हैं। इस कारण मिट्टी की जैविक संरचना प्रभावित होती है। नमी में भी कमी आती है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। ऊपरी परत की घुलनशीलता व जैविक कार्बन की क्षमता में कमी आ जाती है।
किसानों को किया जा रहा जागरूक : जिला प्रशासन व कृषि विभाग की ओर से खेतों में पराली न जलाने को लेकर किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। बीते बुधवार को विकास भवन में आयोजित किसान दिवस में डीएम आर्यका अखौरी की ओर से अपील की गई थी कि खेत में पराली न जलाएं। इसी क्रम में जमानिया क्षेत्र में धान क्रॉप कटिंग के दौरान भी यही बात कही गई।
अब तक कुल 32 मामले प्रकाश में आए हैं। इनमें 25 कूड़ा और सात मामले पराली जलाने के हैं। पराली जलाने वालों के खिलाफ 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। -अतींद्र सिंह उपनिदेशक,कृषि