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नियम-शर्ते ताक पर : भूमि का उपयोग बदला नहीं, खेत और बाग की जमीन पर प्लॉटिंग

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शहर से सटे सुखदेवपुर के पास की गयी प्लाटिंग। संवाद
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गाजीपुर। हाईवे के किनारे के जमीन का खुला अवैध धंधा चल रहा है। भूमि उपयोग (लैंड यूज) में बदलाव के बगैर खेतों और बागों को काट-कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं।
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हैरानी की बात यह है कि इनमें से किसी कॉलोनी का नक्शा विनियत क्षेत्र अधिकारी कार्यालय व निकायों से पास नहीं कराया गया है और न ही किसी विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेने की जहमत उठाई है।नियमों के मुताबिक, शहरी क्षेत्र में नगर निकाय व ग्रामीण क्षेत्र में कालोनी बनाने के लिए जिला पंचायत और राजस्व विभाग से अनुमति, लेआउट की मंजूरी, लेनी होती है।
बिल्डिंग प्लान के साथ-पर्यावरण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी जरूरी होती हैं, लेकिन शहर से सटे शेखपुर, सुखदेवपुर, आलमपट्टी, मीरनपुर, सक्का, विन्ध्वलिया, अंधऊ, आदर्शबाजार, फाक्सगंज, महाराजगंज, कठवा मोड, भूतहियाटाड, मनिहारी, नंदगंज आदि इलाकों में प्लांटिंग कर नियमों को दरकिनार कर कालोनियां बनाई जा रही हैं। जानकारों के मुताबिक हाईवे के आसपास की जमीन को लाखों में खरीदकर, प्लॉटिंग के बाद करोड़ों में बेचा जा रहा है।
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ये हैं कॉलोनी बनाने के नियम

कानूनन कॉलोनी बनाने के लिए नगर निकाय, जिला पंचायत, विनियमित अधिकारी और राजस्व विभागों से मंजूरी लेना जरूरी है। मिट्टी की जांच रिपोर्ट, पेड़ काटने की अनुमति और अन्य तकनीकी स्वीकृति भी हासिल करनी होती हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिना नक्शा पास कराए प्लॉट काटना और बेचना सीधे दंडनीय कार्रवाई की श्रेणी में आता है। किसी भी नई आवासीय कॉलोनी के लिए न्यूनतम एक एकड़ भूमि, भूमि उपयोग परिवर्तन, और नगर निकाय से लेआउट प्लान की स्वीकृति अनिवार्य है। कॉलोनी में मुख्य सड़क कम से कम 9 मीटर चौड़ी और आंतरिक सड़कें 6 मीटर की होनी चाहिए। वहीं, कुल क्षेत्रफल का 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा पार्क व ओपन स्पेस के लिए आरक्षित करना जरूरी है। साथ ही पानी, बिजली और ड्रेनेज व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी डेवलपर की होती है।
अभी तक कॉलोनी का कोई भी नक्शा पास करने के लिए नहीं आया है। न ही किसी ने प्लॉटिंग के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने के लिए आवेदन किया है। अगर इस तरह की गतिविधियां संचालित हो रही है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -संतोष सिंह, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, गाजीपुर।
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