शोहदाए कर्बला हजरत इमाम हुसैन और उनके रफीकों एवं जानिशारों की शहादत के बाद इनकी लाशों को कर्बला की तपती रेत पर बेबोरो कफन छोड़ दिया गया था, जिसे 40वें दिन कर्बला में दफन किया गया। उन्हीं शहीदों की याद में
चहल्लुम गुरुवार को पूरे जिले में मनाया गया और उनकी कुर्बानियों को नम आंखों से याद किया गया।
शहर के नुरुद्दीनपुरा इमामबाड़ा उम्मेलैला बीबी मरहुमा से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अंजुमन गुलजारे मोहम्मदी के
तत्वावधान में जुलूस निकाला गया, जिसमें अलम ताबूत जुलजनाह और अमारिया शिक्षा धर्म गुरु मौलाना तनवीरुल हसन जैनबी ने तकरीर कर बरामद कराई। जुलूस में मौलाना राहत हुसैन जंगीपुरी साहब, जावेद हुसैन, हसन रजा, हैदरी साहब
एवं जाबिर अली जंगीपुरी साहब ने कर्बला के शहीदों के बारे में लोगों को बताया। जुलूस में तमाम अंजुमनों ने नौहाख्वानी की। अंत में गुलजारे मोहम्मदी रजि. अंजुमन की तरफ से शुक्रिया अदा किया गया। जुलूस नई सब्जी मंडी, रजदेपुर रेलवे
क्रासिंग, रौजा होते हुए विशेश्वरगंज स्थित इमामबाड़े में आकर शाम को समाप्त हुआ।
बहरियाबाद संवाददाता के अनुसार, गुरुवार सुबह 10 बजे से दक्षिण मुहल्ला से जुलूस रवाना हुआ। जो उत्तर मुहल्ला एवं
बाजार गश्त करते हुए कर्बला पहुंचा। यहां ताजिए दफन किए गए। जुलूस के दौरान उत्तर मुहल्ला में जुलूस को खेताब फरमाते हुए मौलाना जव्वाद हैदर मुबारकपुरी ने कहा कि इमाम हुसैन ने अपना घर लुटाकर सिर्फ दीन ही नहीं, बल्कि
इंसानियत को भी बचाने का काम किया। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने अपनी 63 साला जिंदगी में जिस दीन को मुकम्मल तौर पर पेश किया, उसी दीन को इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में अपने कुनबे की शहादत देकर कयामत
तक सुरक्षित कर लिया। जुलूस के दौरान अंजुमन रिजवानिया पहेतिया, अंजुमन अब्बासिया मुबारकपुर, अंजुमन बेबालिया बुजुर्गा एवं स्थानीय अंजुमनें नौहा ख्वानी, मातम और सीनाजनी करती रही। जुलूस में शहंशाह, सलीम अंसारी, जावेद
हैदर, आसिफ इकबाल रिजवी, सलीम अंसारी, दानिश, शादाब, मोहिउद्दीन, कुर्बान अली, आमिर, हैदर अब्बास आदि शामिल थे।