वाराणसी-गाजीपुर राजमार्ग (नेशनल हाईवे 29) को फोरलेन बनाने के लिए अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे की नोटिस किसानों को मिलने लगा है। मुआवजे की रकम अनुमान से काफी कम होने के कारण किसान खफा हैं और आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। कई किसानों नोटिस लेने से इनकार कर दिया है। किसानों का कहना कि सरकार 2013 के सर्किल रेट से मुआवजे का भुगतान कर रही है, जो वर्तमान दर से कई गुना कम है।
वाराणसी से गाजीपुर जाने वाले एनएच 29 के चौड़ीकरण एवं बाईपास निर्माण के लिए इशोपुर, गोपालपुर, औड़िहार, शेखपुर, सुल्तानपुर, अलीपुर, मदारीपुर, मिर्जापुर, शंकरपुर, नसीरपुर के किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई है। किसानों को उम्मीद थी कि जमीन का बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा मिलेगा। अब मुआवजे का नोटिस मिलने पर पता चला है कि प्रशासन सर्किल रेट के चार गुना मुआवजा दे रहा है और सर्किल रेट भी 2013 के हिसाब से जोड़ा जा रहा है। इससे निराश किसानों ने जमीन नहीं देने की मन बनाया है। उनका कहना कि वे इस कीमत पर सरकार को कत्तई जमीन देंगे चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़े।
गोपालपुर निवासी रविशंकर तिवारी ने मुआवजे की रकम को किसानों के साथ धोखा बताया है। औड़िहार के रामराज यादव कहना है कि जमीन अधिग्रहण से बेघर और खेती की जमीन से वंचित हुए लोग मुआवजे की राशि से दूसरी जगह जमीन का एक टुकड़ा नहीं खरीद सकते, मकान बनवाना तो सपना हो जाएगा। दरअसल मुआवजे की राशि की जिस दर पर दी जा रही है, उसकी तुलना में वर्तमान सर्किल रेट भी 86 गुना से ज्यादा हो गया है। ऐसे में कोई जमीन कहां से खरीद पाएगा।
शादी-भादी के रामसबद गुप्ता का कहना है कि किसानों को लूटा जा रही है और हम जीते जी ऐसा नहीं होने देंगे। औड़िहार के सुभाष सेठ ने कहा कि सड़क छत और रोटी दोनों छीन रही है। सरकार ने 60 दिनों के बाद भूस्वामी का कब्जा हटाकर जमीन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को सौंपने का नोटिस दिया है लेकिन हम अपनी जमीन नहीं देंगे।
फोरलेन निर्माण में सबसे बड़ा झटका सैदपुर नगर से लगे सुल्तानपुर तरवनियां, मदारीपुर, बैजूनगर, शेखपुर के भू-स्वामियों को लगा है। नगर सटे इन गांवों के जमीन की कीमत करोड़ों में पहुंच चुकी है जबकि मुआवजे की रकम कुछ लाख भी नहीं होगी। सर्वाधिक नुकसान सैदपुर नगर के ठाकुर महाल के लोगों को उठाना पडे़गा, जिनकी 25 बीघा जमीन सड़क में जा रही है। सुल्तानपुर तरवनियां, रेहड्डा क्षेत्र में भी जमीन का बाजार मूल्य करोड़ों में हैं। भू-स्वामी रामजी सिंह, इंद्रसेन सिंह, उग्रसेन सिंह, हृदयनारायण सिंह, जगत सिंह, अनिल सिंह, दयालु सिंह, ऋषि सिंह, राकेश सिंह ने कहा कि सरकार धोखा कर रही है।
क्या है समस्या
दरअसल सरकार वर्ष 2013 के सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजे का भुगतान कर रही है जबकि जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया 2015 में शुरू हुई थी। पिछले तीन वर्षों में सर्किल रेट बढ़कर 60 से 80 गुना तक हो गया है। मसलन राजमार्ग के किनारे के अतरसुआ गांव की जमीन का वर्ष 2013 में सर्किल रेट 51 रुपये वर्ग मीटर था जो 2016 में 8600 रुपये हो गया है। किसानों का कहना है कि सरकार जब जमीन ले रही तब के रेट से मुआवजा दे, पुरानी दर पर मुआवजा देना किसानों के साथ धोखा है।
नेशनल हाईवे के लिए मुआवजा भुगतान में मनमानी के खिलाफ किसान आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। जयशंकर सिंह के आवास पर हुई किसानों की हुई बैठक में कृषि भूमि बचाओ मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अमरनाथ यादव और प्रवक्ता शिवजी सिंह ने कहा कि वर्ष 2013 के अनुसार मुआवजा दिया जा रहा है जबकि 2016 में सर्किल रेट में 60 से 80 गुना का अंतर आ गया है। किसान इस दर पर जमीन किसी कीमत पर नहीं देंगे। इसके खिलाफ आंदोलन होगा।
मोर्चा के पदाधिकारी 19 मई से खरौना से अतरसुआ के बीच के किसानों से संपर्क करेंगे। बैठक में अमलधारी यादव, इंद्रसेन सिंह, ऋषि नारायण सिंह, श्यामनारायण सिंह, उदय सिंह, जगत सिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता रामजी सिंह और संचालन जयशंकर सिंह ने किया।