गाजीपुर। छात्रों में स्वत: पढ़ने की प्रवृत्ति को विकसित करने के उद्देश्य से प्रत्येक राजकीय माध्यमिक विद्यालय में पुस्तकालय की स्थापना की गई है। इस पुस्तकालय में रीडिंग कॉर्नर बनाने पर जोर दिया गया है। इस कॉर्नर में छात्रों को ज्ञानवर्धन की पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। पुस्तकालय के सुचारू रूप से संचालन के लिए छात्र पुस्तकालय काउंसिल का गठन किया जाएगा, जो इन गतिविधियों में सहयोग प्रदान करेगा। जिले के 28 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को इसका लाभ मिलेगा।
राज्य परियोजना निदेशक कंचन वर्मा का एक निर्देश पत्र सभी जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजा गया है। इस पत्र में यह कहा गया है कि पुस्तकालय विद्यालय का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसमें उपलब्ध सुविधाएं छात्रों के पढ़ने और समझने में सहयोग प्रदान करेंगी। इसके साथ ही छात्रों की मौखिक एवं लिखित भाषा सुदृढ़ होगी। समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट में जिले के 28 सहित प्रदेश के 2306 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालय के सुदृढ़ीकरण के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है। पुस्तकालय पर इसलिए विशेष ध्यान दिया गया है कि छात्र स्वयं वहां जाकर अध्ययन करें और अपने ज्ञान को बढ़ाएं। इससे छात्रों में स्वाध्याय की आदतों का विकास होगा और उनको विभिन्न प्रकार की पुस्तकों के अध्ययन का अवसर भी मिलेगा। पुस्तकालय प्रतिदिन विद्यालय के खुलने की अवधि में ही खुले रहेंगे। पुस्तकालय की व्यवस्था होने से छात्रों के साथ-साथ विद्यालय के सभी अध्यापक भी उसमें अध्ययन कर अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकेंगे। उनके खाली घंटे का सदुपयोग भी हो सकेगा। जो पुस्तकें दुर्लभ हैं, उन्हें भी पढ़ने का अवसर पुस्तकालय में छात्रों को मिलेगा। पुस्तकालय में दिव्यांग विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए विशेष सुविधा या व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक विद्यालय में एसएमडीसी की ओर से किसी एक सहायक अध्यापक या प्रवक्ता को पुस्तकालय का प्रभारी नामित किया जाएगा जो उसका संचालन करता रहेगा।