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बारिश के बाद खेतों में दिखनेशीगी चहल- पहल

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गाजीपुर। इन दिनों हो रही अच्छी बरसात के बाद किसानों के चेहरे खिल गए हैं। खरीफ की अरहर, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि की फसल की बुआई के साथ ही धान की रोपाई भी शुरू कर दी है। इससे खेतों में चहल-पहल बढ़ गई है। जनपद के जमानिया, सेवराई तहसीलों में व्यापक मात्रा में धान की खेती की जाती है। किसानों का कहना है कि बारिश के इंतजार में फसल लेट हो रही थी अब बारिश के बाद धान की रोपाई शुरू कर दी गई है।
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इधर तीन दिन से हो रही लगातार बारिश से खेतों में लेवनी का काम आसान हो गया है। किसानों ने पहले से ही धान की नर्सरी डाल रखी थी। इस समय का लाभ लेते हुए किसानों ने घर के सदस्यों तथा बनिहारिनों के माध्यम से रोपाई का काम शुरू कर दिया है। इसके साथ ही अरहर, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि की फसलों की बुआई भी होने लगी है। जून माह के पहले सप्ताह में ही धान की नर्सरी डाल दिया जाता है। 25 से 30 दिनों में यह रोपाई लायक हो जाती है। जिले में एक लाख 56 हजार 629 हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है। इसके अलावा ज्वार, बाजरा, मक्का, दलहन, तिलहन आदि की बुआई की जाती है।
भौगोलिक स्थिति के हिसाब से जमानिया क्षेत्र चावल की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है। इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। जमानिया संवाददाता के मुताबिक जीवपुर, मतसा, जमानिया समेत आस पास के गांवों के किसान अब खेती में व्यस्त हो गए है। इस क्षेत्र में महीन तथा मध्यम दाने के चावलों की खेती पर इस समय जोर दिया जा रहा है। मोटे दाने की फसल में कुछ कमी आई है। दुबिहां संवाददाता के अनुसार हरदासपुर ,ऊंचाडीह, दुबिहाँ, नेवदा, कमसड़ी, गोविंदपुर आदि गांवों के किसानों की ओर से भी धान की रोपाई शुरू हो गई है।
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सूखी हैं नहरें और राजवाहे
गाजीपुर। चावल की खेती के लिए सबसे आवश्यक पानी है। इसके लिए जमानिया, दिलदारनगर, करीमुद्दीनपुर, सैदपुर आदि इलाकों में नहरों का जाल बिछा दिया गया। खास बात यह है कि इतनी बरसात के बाद भी इन नहरों में पर्याप्त पानी देखने को नहीं मिल रहा है। देवकली पंप कैनाल से निकले कई रजवाहे अभी सूखे हुए है। चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल भी पूरी क्षमता से नहीं चल रहा है। दुबिहां क्षेत्र के दलपतपुर, राजवाहा, रामदासपुर राजवाहा,समेत कई माइनरों में वर्षों से पानी नहीं छोड़ा गया। नहरों से जुड़ें नालों और कुलाबों को साफ नहीं कराया गया है।
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