मंगलवार की रात साढ़े आठ बजे तक जनपद का वातावरण पूरी तरह शांत था। अधिकांश लोग घर पहुंच गए थे, तो कुछ बाजार में थे। इसी बीच टीवी चैनलों के माध्यम से पीएम नरेंद्र मोदी की 500 और 1000 की नोट पर प्रतिबंध की घोषणा सुनते ही लोग सन्न रह गए। इस बात की खबर लगते ही लोगों में अफरा-तफरी मच गई। फिर क्या था, जिसके पास भारी मात्रा में नोट थे, वह उल्टे पांव इसे जमा करने के लिए एटीएम पर पहुंच गया। रात 12 बजे तक जिन लोगों ने रुपये जमा कर दिए उन्होंने राहत की सांस ली। लेकिन जो जमा नहीं कर पाए, वे दूसरे दिन भी परेशान रहे। इन नोटों पर प्रतिबंध लगाने का खासा असर बुधवार को दिखा। कई लोगों का कारोबार ठप रहा।
देश की अर्थव्यवस्था पर नकली नोट, काले धन और भ्रष्टाचार के नकारात्मक असर को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा ने आम और खास आदमी की बेचैनी बढ़ा दी है। सामान्य लोगों की परेशानी इस बात से बढ़ गई कि उन्हें पैसा जमा करने के लिए बैंक तक जाना पड़ेगा, वहीं जिनके पास अधिक धन था, वह इस सोच में पड़ गए कि अगर कई किश्तों में भी भारी मात्रा में पैसा जमा करेंगे तो बैंक के लेखा-जोखा में वह टैक्स के दायरे में आ जाएंगे। ऐसे लोग यह सोच कर परेशान हैं कि आखिरकार अपने पैसे को किस तरह से सुरक्षित करें। वह बैंक के अधिकारियों के साथ ही अन्य लोगों से इसके लिए राय-मशविरा करते रहे । बैंक और एटीएम खुलने पर किस तरीके से वह अपने पैसों को बैंकों में जमा करेंगे तथा इनकम टैक्स के दायरे में न आए और पैसा सुरक्षित रहे इसका रास्ता तलाश रहे हैं।
रात में जैसे ही पांच और एक हजार नोट पर प्रतिबंध लगने की खबर आई, जिनके पास ज्यादा नोट थे, वे इसे जमा करने के लिए शहर के मिश्रबाजार स्थित स्टेट बैंक की शाखा में पहुंच गए। भीड़ की वजह से लाइन लग गई। लाइन में खड़े उन लोगों को उस समय निराशा हुई, जब ठीक रात 12 बजे एटीएम ने काम करना बंद कर दिया। इसके लोगों को बिना पैसा जमा किए ही निराश लौटना पड़ा। कुल मिलाकर जो लोग कल तक घरों में एक हजार और पांच का लाखों रुपए का नोट रखकर इस बात का गुमान कर रहे थे कि उनके पास पैसा है, पीएम मोदी के फरमान के बाद उनका ही पैसा उन्हें परेशान करने लगा है।