शराब कारोबारियों की कंपनी के मैनेजर मनोज सिंह की हत्या व 28 लाख लूट के मामले में बाइकर्स लुटेरों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दो दिन से हांफ रही है। लेकिन पुलिस के हाथ खाली हैं। हालांकि कई लोगों के पुलिस ने पूछताछ के लिए उठाया है। इसे लेकर पुलिस ही नहीं बल्कि महकमे के आला अधिकारियों की भी नींद उड़ गई है।
घटना के बाद से बाइकर्स लुटेरों की गिरफ्तारी के लिए एसपी डा. उमेश चंद्र श्रीवास्तव की ओर से खास योजना तैयार की गई। उनकी ओर से हाल में हुई लूट की घटनाओं में पकड़े गए आरोपियों तथा उनके गिरोह के फरार सदस्यों के बारे में चिट्ठा तैयार कराया गया। इसके साथ ही जिले में बिहार और अन्य समीपवर्ती जिलों के कौन-कौन लुटेरे और शूटर सक्रिय रहे हैं, इसके बारे में क्राइम ब्रांच के साथ ही जिले में लंबे समय से तैनात दारोगाओं से भी जानकारी ली गई। साथ ही पुलिस टीम के साथ ही क्राइम ब्रांच की सर्विलांस टीम को घटना के वक्त उक्त क्षेत्र में चले मोबाइल नंबरों को ट्रैस करते हुए सीडीआर बनाने का भी निर्देश दिया।
साथ ही कई संदिग्धों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाने की बात कही। इसके बाद पुलिस की अलग-अलग टीमें रात भर शहर सहित जिले के विभिन्न हिस्सों में संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी करती रही। लेकिन पुलिस को खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ा। घटना की प्रगति के बारे में एसपी सहित पुलिस के आलाधिकारियों ने जब पुलिस टीमों के साथ ही क्राइम ब्रांच से पूछताछ की तो सभी निरुत्तर हो गए। उनका कहना था कि कुछ क्लू नहीं मिल पा रहा है। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोग कुछ बताने को तैयार नहीं है।
जिनसे पूछताछ की जा रही है, वह भी कोई सटीक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। फिर भी लुटेरों तक पहुंचने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के संबंध में पूछे जाने पर एसपी डा. उमेश चंद्र श्रीवास्तव का कहना था कि अभी तक कोई सफलता नहीं मिल सकी है। लुटेरों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।