रेवतीपुर के पकड़ी गांव निवासी राजेश यादव हत्याकांड में पुलिस ने आरोपी
चिकित्सक दंपती को क्लीन चिट देते हुए निर्दोष बताया है। एसपी डा. उमेश
चंद्र का कहना है कि राजेश की मौत सड़क हादसे में ही हुई है। फोरेंसिक
विशेषज्ञों की जांच में भी यह तथ्य सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि
राजेश की मौत के पीछे अस्पताल के तीन कर्मचारी जिम्मेदार रहे हैं। विवाद
होने पर उन्हीं कर्मियों ने उसे दौड़ाया था, जिसके चलते भागते समय वह सड़क
हादसे का शिकार हुआ। इसलिए आरोपी तीनों कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की
जाएगी। एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया है जबकि दो फरार आरोपियों की
तलाश की जा रही है।
शनिवार को पत्रकारवार्ता में एसपी ने इस घटनाक्रम
के बारे में जानकारी दी। पुलिस के अनुसार 19 अप्रैल की सुबह राजेश यादव का
शव सिंह लाइफ केयर हास्पिटल के पास सड़क पर पाई गई थी। इस मामले में मृतक
के पिता आनंदी यादव ने अस्पताल के चिकित्सक दंपती डा. राजेश सिंह और उनकी
पत्नी डा. अनुपमा सिंह तथा तीन कर्मियों केखिलाफ हत्या और 50 हजार रुपये
लूट का मुकदमा दर्ज कराया था। तीन डाक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया
जिसकी वीडियोग्राफी भी हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पूर्व 24 चोटें
की बात सामने आई।
इस मामले में फोरेंसिक विशेषज्ञों की भी मदद ली गई।
विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट में भी मौत के पीछे सड़क हादसे को ही मुख्य
कारण बताया गया है। कप्तान का यह भी कहना था कि दुर्घटना के दौरान राजेश का
पिता अस्पताल में नहीं था। उसकी तहरीर पर चिकित्सक दंपती केखिलाफ हत्या का
मामला दर्ज कर पुलिस जांच-पड़ताल में जुटी थी। अस्पताल में कोई भी चश्मदीद
गवाह नहीं मिला। मृतक के पिता और उसकी बहन का बयान रिकार्ड किया गया है।
बहन का कहना है कि उसके भाई की कर्मचारियों से मारपीट हुई थी और उसका भाई
अस्पताल से बाहर भागा था। मैंने अस्पताल के कर्मचारियों से बारी-बारी से
पूछताछ की।
पूछताछ में यह बात सामने आई कि मां का ड्रिप बदलने को लेकर
राजेश की कर्मचारियों से विवाद हुआ था, इस पर उन्होंने राजेश को अस्पताल से
बाहर भगा दिया था। इस मामले में अस्पताल के कर्मचारी अंधऊ निवासी शाबिर
जमील को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अब्दुल अंसार और रामसती प्रजापति की
तलाश की जा रही है। तीनों आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या करने के लिए
उत्प्रेरित करने की धारा 108 और 109 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले
की विवेचना जारी है लेकिन पुलिस की यह थ्योरी लोगों के गले नहीं उतर रही
है।
आरोपी शाबिर ने बताया कुछ और
राजेश यादव
हत्याकांड के मामले में पुलिस द्वारा पकड़े गए सिंह लाइफ केयर अस्पताल के
कर्मचारी शाबिर जमील के चेहरे पर काफी घबराहट थी। पूछताछ में वह ठीक से बोल
नहीं पा रहा था। उसकी आवाज में हकलाहट से ऐसे प्रतीत हो रहा था कि वह किसी
दबाव में बोल रहा था। बातचीत में उसने मामले को दूसरा रूप दे दिया। वह
हकलाते हुए बोला कि घटना की रात सकरा गांव से एक महिला का इमरजेंसी केस आया
था।
सभी कर्मचारी उसी में लगे हुए थे। इसी बीच राजेश वहां पहुंचा और ड्रिप
बदलने की बात कहने लगा। इस पर जिन लोगों का मरीज की हालत गंभीर थी, उनसे
राजेश की कहा-सुनी होने लगी। इसके बाद राजेश की उनसे हाथापाई होने लगी,
जिससे राजेश को अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया। पिछले दिनों पुलिस अधीक्षक
ने मीडिया कर्मियों को यह बयान दिया था कि घटना के दिन चिकित्सक दंपती
अस्पताल में मौजूद नहीं थे। जबकि शनिवार को पुलिस की गिरफ्त में आए
कर्मचारी शाबिर जमील का कहना था कि उस दिन दंपती अस्पताल में ही थे। मैं
पूरी तरह से निर्दोष हूं।
धमकी देकर बयान किया रिकार्ड
पुलिस द्वारा चिकित्सक दंपती को दी गई क्लीन चिट
पर मृतक के पिता आनंदी यादव ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है। उसका साफ कहना है
कि चिकित्सक दंपती ने कर्मियों के साथ मिलकर मेरे बेटे की हत्या की है।
राजनीतिक दबाव में पुलिस इस मामले में लीपापोती ही नहीं की। मुझे और मेरे
परिवारीजनों को फर्जी मुकदमे में फंसाकर जिंदगी बर्बाद करने की धमकी तक दी।
धमका कर ही पुलिस ने अपने मन माफिक बयान रिकार्ड कर लिया। पुलिस की इस
ज्यादती के खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ूंगा। चिकित्सक दंपती को बचाने की
साजिश में शामिल रहे पुलिस कर्मियों और पुलिस अधिकारियों को एक दिन जरूर
कठघरे में खड़ा करूंगा।