सुमित कहां है, उसे भी साथ ले लो। मम्मी पापा सोए हुए हैं, उन्हें जगा लो,
बेटी बाबू को गोद में उठा लो और दादी का हाथ पकड़कर उन्हें बाहर लेकर भागो।
देखना घर के अंदर कोई छूट न जाए। अपने घर से बाहर निकलकर दूसरे मकान के
पास क्यों खड़ी हो, यहां से हटो और ऐसे स्थान पर चलो जहां कोई मकान या पेड़
न हो। कुछ इसी तरह से शोर-शराबा होता रहा भूंकप के झटके के दौरान। झटके की
वजह से पल भर में ही लोगों को अपना ही मकान खतरनाक नजर आने लगा। शोर-शराबे
के बीच फिजा में देर तक भागो-भागो भूकंप आया का शोर गूंजता रहा।
रोज
की तरह शनिवार को लोग अपने मकानों में थे। कोई महिला खाना बना रही थी तो
कोई आराम कर रहा था। कोई गहरी नींद में था तो कोई सोने के प्रयास में। इसी
बीच भूकंप से झटके से मकान के हिलते ही लोगों का कलेजा दहल उठा। फिजा में
भूकंप आया, भूकंप आया की आवाज गूंजने लगी। जो जिस हाल में था, उसी हाल में
निकलकर घरों से बाहर भागने लगा। कोई मां अपने कलेजे के टुकड़ों को लेकर
बाहर भाग रही थी तो कोई बेटा, अपनी बूढ़ी मां को कंधे का सहारा देकर
सुरक्षित स्थान पर ले जाने मेें जुट गया। घरों से बाहर भागने के दौरान
लोगों की नजर उन मकानों की तरफ टिकी रही कि जिनके बगल से वे निकल रहे थे।
उनके मन में यह खौफ था कि भागते समय कही इन मकानों के गिरने पर वह उसकी
चपेट में ना आ जाएं। घरों से भागने वालों के पांव इन स्थानों पर जाकर थम
रहे थे, जहां कोई मकान या पेड़ नहीं था। घबराहट के बीच कई लोगों के आंखों
से आंसू निकल पड़े। झटके की वजह से लोगों को अपना मकान ही पराया नजर आने
लगा। घंटों लोग मकानों से बाहर रहे। जब लोगों के दिल को पूरी तरह से यह
तसल्ली हो गई कि अब भूकंप का झटका नहीं आएगा, इसके बाद लोग अपने-अपने घरों
को लौटे। वहीं भकूंप के झटके के बीच कोई कुर्सी से गिर गया तो कहीं किचेन
में रखे बर्तन गिर गए। शहर के चंद्रशेखर नगर कालोनी की बीना सिंह ने बताया
कि जिस समय भूकंप का झटका महसूस हुआ, उस समय वह अपनी सास की आंख में दवा
डाल रही थीं।
झटके के चलते हाथ तेजी से हिलने लगा और दवा आंख के बजाए बाहर
गिर गई। इस पर सासू मां झल्ला उठीं लेकिन जब उन्हें मालूम हुआ कि भूकंप के
चलते दवा बाहर गिर गई तो वह भी सहम र्गईं। यहीं की प्रतिमा ने बताया कि मैं
चाय बना रही थी। भूकंप के झटके से किचेन में रैक पर रखे बर्तन गिरने लगे।
घबड़ाहट के बीच मैं किचेन से भाग खड़ी हुई। माया देवी टीवी देख रही थीं।
इसी दौरान स्टैंड पर रखा कूलर गिर गया। बाहर लोग भागो भागो भूकंप का शोर
मचा रहे थे। चंद्रशेखर नगर की ही गिरिजा देवी ने बताया कि वह कुर्सी पर
बैठीं थीं। भूकंप आने पर कुर्सी हिलने से गिर गई। मुझे लगा कि चक्कर आ गया।
बाद में पता चला कि भूकंप आया है।