रामपुर माझा थानाक्षेत्र के माझा गांव में रविवार की रात एक पिकअप चालक ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के बेटे और बेटी पुलिस की प्रताड़ना से तंग आकर पिता के सुसाइड करने का आरोप लगाया है। कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। सोमवार को शव को कब्जे में लेने को लेकर पुलिस के साथ ग्रामीणों की नोकझोंक भी हुई। ग्रामीण परिजनों के साथ थाने पर धरने पर बैठ गए। मौके पर पहुंचे एएसपी सिटी ने जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण शांत हुए।
माझा गांव निवासी राकेश गुप्ता (47) रविवार की रात 8 बजे भोजन करके कमरे में सोने चले गए। रात करीब 12 बजे कमरे के अंदर खूंटी में नायलॉन की रस्सी लगाकर जान दे दी। मृतक की छोटी बेटी अंजना के मुताबिक वह रात में कमरे में देखी तो चारपाई पर पिता नहीं थे। रस्सी के सहारे उन्हें लटकता देखकर वह चीखने लगी। दूसरे कमरे में सो रही उसकी बड़ी बहन रंजना भी दौड़ी लेकिन उनकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस शव को उतार कर थाने ले गई। मृतक की बेटी अंजना और बेटे आशीष सहित परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस की प्रताड़ना से तंग आकर उनके पिता ने यह कदम उठाया है। मृतक के परिवार और ग्रामीण थाने में सुबह आठ बजे से शव रखकर उच्चाधिकारियों को बुलाने की मांग करने लगे। सीओ सदर सुधाकर पांडेय ने लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने। एक घंटे बाद एएसपी सिटी ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद पहुंचे और ग्रामीणों को समझा-बुझायाकर शांत कराया। इसके बाद साढ़े 11 बजे शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। दूसरी ओर घटना की जानकारी होने पर सैदपुर सपा विधायक अंकित भारती के पिता ओपी भारती भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी।
अंजना के मुताबिक घटना के समय उसकी मां कृष्णा देवी और उसके दोनों भाई ननिहाल धानापुर गए थे। जहां उसकी नानी लक्ष्मीना देवी की तेरहवीं थी। उन्हें इसकी सूचना दी गई तो वे रात में दो बजे पहुंचे। मृतक की दो बेटियां रंजना, अंजना और दो बेटे आशीष एवं आलोक हैं। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। रंजना की शादी दो वर्ष पहले हुई है। वहीं बड़ा बेटा आशीष एसएससी की तैयारी कर रहा है और छोटा बेटा पिता के साथ घर पर रहता था।
मृतक के बेटे आशीष गुप्ता के मुताबिक 30 जनवरी को उनके पिता राकेश बाजार से सामान लेकर घर आ रहे थे। उनकी गाड़ी से अचानक बाइक सवार एक नाबालिग टकराकर घायल हो गया। पुलिस ने पिकअप गाड़ी कब्जे में ले ली। पिता ने उसे अस्पताल पहुंचाया और इलाज कराया लेकिन उसके घर वालों ने पुलिस से शिकायत कर दी। पुलिस गाड़ी भी पकड़ ली। उस दिन पुलिस वालों ने सात हजार रुपये लेकर पापा को छोड़ दिया लेकिन उसके बाद से गाड़ी छोड़ने के लिए और पैसों की मांग करने लगे। पुलिस बेवजह पैसे की मांग कर प्रताड़ित कर रही थी। जबकि राकेश घायल किशोर के दवा, इलाज का खर्च देने को तैयार था। दो-तीन दिन पहले ही गाड़ी थाने से छुड़ाकर लाया था। मृतक की बेटी अंजना ने आरोप लगाया कि पापा को बार-बार फोन आ रहा था। फोन पर उनसे पैसों की डिमांड की जा रही थी। पापा ने फोन पर कहा था मेरी गाड़ी छुड़वा दो, धीरे-धीरे कमाकर पांच-पांच सौ रुपये करके पैसे चुका दूंगा लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे। तीन दिन से पापा ने खाना-पीना कम कर दिया था। हमेशा तनाव में रहते थे।