गाजीपुर। 23 दुष्कर्म पीड़िताओं की पीड़ा लंबित फाइलों ने और बढ़ा दी है। वहीं, दहेज उत्पीड़न के 30 पात्रों को खाते नहीं खुले हैं। दोनों मामले में पीड़िताओं की संख्या 53 हैं, जिन्हें लाभांवित की स्वीकृति तो मिल गई है, लेकिन दो महीने में बैंक का खाता ही नहीं खुला है। यहीं नहीं 11 वर्ष में पॉक्सो, एसिड अटैक व दहेज उत्पीड़न के 63 पात्रों रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष का लाभ मिल चुका है। अब तक आए 486 आवेदनों में 370 अपात्र मिले हैं, जिनके दुष्कर्म का दावा मेडिकल जांच में झूठा मिला है।
पीड़िताओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 2015 रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान सकेकोष का शुभारंभ हुआ था। इ तहत ऐसे पीड़िताओं को लाभांवित किया जाता है, जो एसिड अटैक, दुष्कर्म और दहेज उत्पीड़न के मामले, जिसमें मां की मौत के बाद बच्चों को लाभ दिया जाता है।
प्रोबेशन विभाग के आंकड़ों के अनुसार योजना के तहम 53 पात्रों को लाभांवित करना है, जिसकी स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन खाता अब तक नहीं खुल सका है। इसमें 23 दुष्कर्म पीड़िता है, जबकि 30 दहेज उत्पीड़न संबंधित है, जिनके मां की मौत हो चुकी है, वहीं आरोपी पिता व अन्य परिजन सलाखों के पीछे हैं।
ऐसे में इन बच्चों का न तो जन्म प्रमाण- पत्र मिल पा रहा है और न ही अन्य कागजात मिल पा रहा है। यह स्थिति करीब दो महीने से बनी हुई है। जबकि संबंधित विभाग की ओर से लगातार पात्रों के रिश्तेदारों और संबंधितों से कागजात उपलब्ध करने के लिए संपर्क कहा जा रहा है। बावजूद स्थिति जस की तस है।
53 पात्रों को योजना से लाभांवित करने की स्वीकृति मिली है। इन पात्रों का खाता खुलना शेष है। पात्रों के सगे-संबंधियों से कागजात मांगा गया। पात्रों का खाता खुलाने व लाभांवित कराने की कार्रवाई तेज चल रही है। - संजय सोनी, जिला प्रोबेशन अधिकारी
योजना के तहत 10 लाख तक मिलती है सहायता
रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष के तहत एसिड अटैक से 10 से 30 प्रतिशत और अधिक झुलसने पर तीन से पांच लाख रुपये, मृत्यु पर परिजनों को 10 लाख रुपये की राशि दी जाती है। वहीं, दहेज मृत्यु के मामले में बच्चों को करीब तीन लाख तो दुष्कर्म और मृत्यु के मामले में 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है।
निराश्रित बच्चों के खाते में गई धनराशि
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना कोविड-19 के तहत 175 बच्चों के खाते में 4000 रुपये प्रतिमाह की दर से अक्तूबर से मार्च तक का विभाग द्वारा धनराशि भेज दी गई है। वहीं बाल सेवा योजना के 1844 बच्चों के खाते में अक्तूबर से दिसंबर तक प्रतिमाह 2500 रुपये की दर से धनराशि भेज जा चुकी है।
2015 से अब लाभांवित हुए पात्र लोगों का आंकड़ा
एसिड अटैक पीड़ित - 3
दहेज उत्पीड़न संबंधित पीड़ित - 28
दुष्कर्म पीड़ित- 32