जिला और महिला अस्पताल डाक्टरों की कमी से जूझ रहा। ऐसे में मरीजों को चिकित्सा कैसे मिले यह बड़ा सवाल है। जहां जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट, पैथालिस्ट और आई सर्जन की कमी है वहीं महिला अस्पताल चार चिकित्सकों के भरोसे संचालित हो रहा है।
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 150 मरीज आते हैं। ओपीडी में चिकित्सकों के समय से नहीं पहुंचने से उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। अक्सर डाक्टर बाहर की दवाएं भी लिखते हैं। जिसका कई बार लोगों ने विरोध भी किया। इतना ही नहीं गंभीर मरीजों को चिकित्सक दूसरे जगह इलाज कराने की सलाह तक देते हैं।
जिला अस्पताल में आंख के सर्जन का पद रिक्त होने से आंख के मरीजों को भटकना पड़ रहा है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जिला अस्पताल में चिकित्सक के कुल 26 पद सृजित हैं लेकिन महज 22 चिकित्सक हैं।
इसी तरह 28 स्टाफ नर्स की जगह 26, दो पैथोलॉजिस्ट की जगह सिर्फ एक की तैनाती है। आंख चिकित्सक के लिए दो पद सृजित हैं जिसमें दोनों रिक्त ैं।
महिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार चिकित्सकों के 15 पद सृजित है जिसमें मात्र चार चिकित्सक ही तैनात हैं।
वहीं अल्ट्रासाउंड रेडियोलॉजिस्ट के न होने से बंद है। ऐसे में मरीज निजी पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर जाने को मजबूर हैं। सर्जिकल वार्ड परिसर में महिला और पुरूषों के लिए स्थापित बर्न वार्ड पूरी तरह से मानक के विपरीत है।
मरीजों को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। एक माह से पाइप लाइन फटी होने से जलापूर्ति ठप है। पर्ची काउंटर और महिला अस्पताल के गेट के पास लगे हैंडपंप से प्रदूषित पानी आ रहा है। गंभीर बीमारी की दवा की कमी है। भी है।