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जिला महिला अस्पताल में चिकित्सकीय सुविधाओं का नहीं मिल रहा लाभ

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जिला महिला अस्पताल में दिन में 12:10 बजे खाली पड़ा ओपीडी नंबर एक की कुर्सी। - फोटो : GHAZIPUR
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चिकित्सीय सुविधाओं को लेकर जिला महिला अस्पताल की स्थिति खराब होती जा रही है। यहां न तो निर्धारित समय से ओपीडी का संचालन किया जाता है और न ही अस्पताल से दवाएं दी जाती हैं। महिला मरीजों को बाहर की दवा लिखी जाती है जिससे तीमारदार महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होते हैं। कोरोना की तीसरी लहर में एहतियात भी नहीं बरती जा रही है। थर्मल स्क्रीनिंग तो दूर लोग मास्क तक नहीं लगा रहे हैं। ओपीडी कक्ष के बाहर तो सामाजिक दूरी का पालन नहीं होता है।
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जिला महिला चिकित्सालय का बृहस्पतिवार को जब अमर उजाला टीम ने जायजा लिया तो चिकित्सा व्यवस्था की पोल खुल गई। सुबह 11.30 बजे अस्पताल में मुख्य गेट पर टेबल तो था लेकिन आने वाले मरीजों एवं उनके तीमारदारों की थर्मल स्क्रीनिंग एवं सैनिटाइजेशन के लिए कोई कर्मचारी नहीं था। सुबह 11.40 बजे अस्पताल के मुख्य गेट के बाद परिसर में पांच से छह महिलाएं फर्श पर बैठकर अपने मरीज का नंबर आने का इंतजार कर रही थी। वहीं औषधि भंडार केंद्र पर दवा लेने वालों की भीड़ नहीं थी। सुबह 11.50 बजे आपरेशन थियेटर के बाहर कूड़े लगा था। उधर से आने-जाने वाले महिला मरीजों को दुर्गंध से बचने के लिए मुंह पर रूमाल रखना पड़ रहा था। दोपहर 12 बजे अस्पताल की दो ओपीडी कक्ष में से एक ओपीडी कक्ष के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए महिला डॉक्टर खालिदा को दिखाने एवं पर्ची जमा करने के लिए मरीजों एवं तीमारदारों की भीड़ लगी हुई थी। वहीं ओपीडी कक्ष संख्या में दोपहर 12.10 बजे डॉक्टर की कुर्सी खाली थी। वहीं ओपीडी कक्ष में मौजूद महिला चिकित्सक की ओर से धड़ल्ले से पर्ची पर बाहर की दवा लिखी जा रही थी। जबकि 12.30 बजे जांच केंद्र पर रिपोर्ट के लिए मरीज खड़े थे। महिला अस्पताल में प्रतिदिन 200 के आस-पासदूर-दराज इलाकों से महिलाएं इलाज के लिए पहुंचती हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था दुरुस्त न होने से उन्हें चिकित्सकीय सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।
डॉक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे बाहर निजी मेडिकल की दवा न लिखें। ऐसी शिकायत मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो चिकित्सक समय पर नहीं आ रहे हैं, उनकी भी जांच होगी।- डॉ. तारकेश्वर, सीएमएस जिला महिला अस्पताल।
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