जिला जेल का निरीक्षण कर बाहर निकलते उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति के सदस्य।
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ग़ाजीपुर । उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति लखनऊ के चेयरमैन डा. उमेश शर्मा के दिशा निर्देशन में मंगलवार को संजय श्रीवास्तव (जोनल सचिव / जेल पर्यवेक्षक उत्तर प्रदेश समिति) के साथ अन्य सदस्यों ने जेल का निरीक्षण किया। करीब दो घंटे तक निरीक्षण किया गया। इस दौरान सबकुछ सामान्य रहा। महिला कैदियों की संख्या 37 है और बच्चों की संख्या 30 है। महिला कैदियों में ज्यादातर महिलाएं दहेज उत्पीड़न में बंद है।
निरीक्षण में जेल में 30 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जिसमें ज्यादातर कैमरे वर्किंग में नहीं हैं। जेल में कैदियों की संख्या 397 के सापेक्ष 797 है, जो दोगुनी से ज्यादा है। जेल के अंदर अस्पताल की क्षमता बीस बेड की है। जिसमें एक कैंसर और दो एचआईवी पीड़ित हैं। समिति के सदस्यों द्वारा अस्पताल में भर्ती कुछ कैदियों से बात की गई। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था को और ठीक करने की बात कही। अस्पताल की व्यवस्था डॉक्टर एससी राय और डॉ शिशिर द्वारा देखी जा रही है। कैदियों के खानपान की व्यवस्था का जायजा लिया गया। जेलर द्वारा टीम को बताया कि जेल में अनिरुद्ध कैदियों द्वारा ही भोजन बनाया जाता है। जेलर ने बताया कि कैदियों की संख्या क्षमता से अधिक होने से भी व्यवस्था में दिक्कत हो रही हैं।
जेल अधीक्षक राजेंद्र कुमार तथा उप जेल अधीक्षक कमल चंद ने बताया कि जेल के अंदर आने वाले कैदियों के परिजनों को गहन जांच के बाद ही अंदर कैदियों से मिलने दिया जाता है। धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने जेल में बंद कैदियों को शिक्षा देते हैं। निरीक्षण में जेल में नाली काफी गंदी पाई गई। पीने के पानी के लिए आरओ सिस्टम तो लगा है, लेकिन छह महीने से खराब है। दो रोटी मेकर लगी है, वह भी ख़राब पाई गईं। निरीक्षण के उपरांत जोन सचिव संजय श्रीवास्तव ने बताया गया कि उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति जेल मैनुअल के अंतर्गत काम करती है। जिस के मुख्य संरक्षक राज्यपाल होते हैं। यह संस्था नारी सुधार, बाल सुधार, जेल में खानपान व्यवस्था, चिकित्सा व्यवस्था को देखती है। समय-समय पर यह संस्था जेल का निरीक्षण करके शासन को रिपोर्ट भेजती रहती है। निरीक्षण करने में मुख्य रूप से संजय श्रीवास्तव जोन सचिव,जिला सचिव अभिषेक सिंह ,सुनिल गुप्ता, विशाल चौरसिया,डॉ धीरज, अनुज अग्रवाल, नितिन आनंद, आदि लोग उपस्थित रहे।