गंगा की मिट्टी का क्षरण रोकने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के साथ ही अब किसान अपनी आमदनी भी बढ़ा सकेंगे। नमामि गंगे योजना के तहत जिले में गंगा के किनारे स्थित गांवों में 200 हेक्टेयर भूमि पर बाग लगाए जाएंगे। बाग लगाने वाले किसानों को उद्यान विभाग की ओर से प्रति माह तीन हजार रुपये प्रति हेक्टेयर पौधों की जीवितता सुनिश्चित होने पर तीन वर्ष तक दिए जाएंगे। खास बात यह कि किसान स्वेच्छा से किसी भी फल का बाग लगा सकता है। निगरानी और देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं किसान की होगी।
प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही गंगा किनारे की मिट्टी का क्षरण रोकने और पर्यावरण बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस क्रम में प्रदेश में गंगा नदी के किनारे के गांवों में नमामि गंगे औद्यानिक मिशन के तहत बाग लगाने की योजना शुरू की गई है। बीते वर्ष शासन की ओर से जिले को 100 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष 46 हेक्टेयर में बाग लगाया गया। योजना को लेकर किसानों के बढ़ते रुझान को देखते हुए बीते वर्ष की तुलना में इस बार जिले के लक्ष्य में इजाफा कर दिया गया है। इस वर्ष 200 हेक्टेयर में बाग लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें एक किसान कम से कम 0.2 हेक्टेयर से लेकर 1.0 हेक्टेयर की भूमि में बाग लगवा सकता है। जिन किसानों के पास स्वयं की जमीन एवं सिंचाई के साधन हों, ऐसे किसानों को योजना में शामिल किया जाएगा।
यह पौधे लगा सकते हैं
किसान खेत में आम, अमरूद, आंवला, बेल एवं नींबू के कलमी पौधों में चयन कर सकते हैं। नए बागों के रोपण के साथ ही किसान तीन वर्ष तक इंटर क्रॉपिंग के रूप में सब्जी, मसाला एवं फूल आदि की खेती भी कर सकते हैं। बाग लगाने वाले किसानों को उद्यान विभाग की ओर से प्रति माह तीन हजार रुपये प्रति हेक्टेअर पौधों की जीवितता सुनिश्चित होने पर तीन वर्ष तक दिए जाएंगे।
प्रथम आवत प्रथम पावत के आधार पर मिलेगा लाभ
गाजीपुर। योजना में ऐसे किस्म के पौधे होंगे जो पर्यावरण सुधार के क्षेत्र में भी सहायक साबित होंगे। बीते वर्ष सौ हेक्टेयर के सापेक्ष 46 हेक्टेयर की पूर्ति हुई थी। किसानों को योजना का लाभ पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा। इसमें छोटे एवं मध्यम किसानों को ही मौका देने का निर्देश है ताकि उन्हें लाभ मिले।
इस वर्ष योजना के अंतर्गत किसानों की ओर से आवेदन किया जा रहा है। इसके बाद विभागीय कर्मचारी संबंधित किसान से संपर्क कर उनके बाग का रेखांकन कराएंगे। - डा. शैलेंद्र दुबे, जिला उद्यान अधिकारी