स्वास्थ्य विभाग में एसीएमओ और डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो रही हैं। स्थिति यह है कि सीएमओ कार्यालय में केवल दो एसीएमओ की ही तैनाती है। वहीं सीएसी-पीएचसी पर 98 डॉक्टर हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों का आंकड़ा भी न के बराबर है। ऐसे में बेहतर चिकित्सकीय सुविधाओं के लिए मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जबकि एसीएमओ के 14 और डॉक्टरों के 206 पद सृजित है, जिसके सापेक्ष यह संख्या चौथाई से भी नीचे है। जनपद के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा देने के लिए 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पांच प्राथमिक स्वास्थ्य स्थापित कराए गए हैं। इसके अलावा 100 से अधिक न्यू पीएचसी और 300 के आसपास स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं।
बावजूद इसके उन ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की किल्लत ग्रामीण इलाकों में ही नहीं मेडकिल कॉलेज अस्पताल में भी बनी हुई है।
ऐसे में हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उपचार के लिए दूसरे जनपद और प्रांतों की शरण लेनी पड़ती है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो सीएमओ कार्यालय में एसीएमओ के 14 पद हैं, जिसमें दो ही एसीएमओ तैनात हैं। ऐसे में ट्राॅमा सेंटर के एक वरिष्ट परामर्श चिकित्सक और तीन डिप्टी सीएमओ से काम चलाया जा रहा है।