संवाद न्यूज एजेंसी
जमानिया। ग्राम पंचायतों को आधुनिक तकनीक और पठन-पाठन की सुविधाओं से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना बजट की तंगी का शिकार हो गई है। वर्ष 2023 में शासन ने 84 ग्राम पंचायतों में हाईटेक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने का निर्णय लिया था, लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी यह योजना धरातल पर पूरी तरह आकार नहीं ले पाई है।
हालत यह है कि अब तक केवल 14 ग्राम पंचायतों में ही सामान्य और शैक्षिक पुस्तकें पहुंचाई जा सकी हैं, जबकि शेष 70 ग्राम पंचायतों में योजना की शुरुआत तक नहीं हो सकी है।
जिन 14 ग्राम पंचायतों में किताबें पहुंची हैं, वहां भी डिजिटल लाइब्रेरी के मुख्य आधार यानी कंप्यूटर, प्रिंटर, इंटरनेट सुविधा, नेटवर्किंग हार्डवेयर, आधुनिक फर्नीचर और ऑडियो-विजुअल उपकरण अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
विभागीय योजना के अनुसार प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना पर लगभग चार लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। इसमें से दो लाख रुपये कंप्यूटर, प्रिंटर व इंटरनेट जैसे डिजिटल संसाधनों पर और शेष दो लाख रुपये पुस्तकों व ई-कंटेंट की व्यवस्था पर व्यय होने हैं।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विद्यार्थियों को ऑनलाइन अध्ययन, ई-बुक्स, रिसर्च कार्य और ऑडियो-विजुअल शिक्षण उपकरणों के जरिए आधुनिक शिक्षा से जोड़ना है।
इस संबंध में एडीओ पंचायत उमेंद्र सिंह ने बताया कि बजट के अभाव में फिलहाल केवल 14 ग्राम पंचायतों में पुस्तकें ही उपलब्ध कराई जा सकी हैं और अन्य डिजिटल उपकरण बाकी हैं।
उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही शासन से धनराशि प्राप्त होगी, शेष 70 ग्राम पंचायतों में भी डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कर सभी आवश्यक संसाधनों के साथ उनका संचालन शुरू करा दिया जाएगा।