गाजीपुर। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो प्रथम रामअवतार प्रसाद की अदालत ने बृहस्पतिवार को नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषी अभिमन्यु को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। दो अन्य दोषियों को 20 -20 साल के कारावास के साथ ही 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की संपूर्ण राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया है। करंडा थाना के एक गांव निवासी एक व्यक्ति ने तहरीर दी थी कि उसकी नाबालिग पुत्री को जनवरी 2020 में गांव का आरोपी अभिमन्यु उसका भाई अन्नू, विशाल अक्सर उससे बात करते थे और मिलते-जुलते थे। 15 अप्रैल 2020 को रात में अभिमन्यु ने उसकी पुत्री को मिलने के लिए बुलाया और वहां पहले से मौजूद उसके दोनों भाइयों ने शादी का झांसा देकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी वीडियो बनाया। वीडियो वायरल की धमकी देकर कई बार संबंध बनाया। वादी की सूचना पर थाना करंडा में तीनों आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल दिया और विवेचना के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से 5 गवाहों को पेश किया गया। दोनों तरफ की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने उपरोक्त सजा सुनाते हुए दोषियों को जेल भेज दिया।
मुख्तार के सहयोगी मंसूर अंसारी का आवेदन निरस्त-गाजीपुर। अपर सत्र न्यायाधीश/ गैंगस्टर जज अलख कुमार की अदालत ने बुधवार की देर शाम मुख्तार अंसारी के सहयोगी मंसूर अंसारी के युसूफपुर में बनाए हुए 18 कमरों को तत्कालीन मुहम्दाबाद कोतवाल घनानंद तिवारी ने गैंगस्टर एक्ट के मामले सीज कर दिया था। उक्त संपत्ति को मुक्ति कराने के लिए मंसूर अंसारी ने जिलाधिकारी के न्यायालय में अर्जी दी थी। जिला मजिस्ट्रेट ने पुलिस की कार्रवाई सही पाते हुए अर्जी निरस्त कर दी थी उक्त आदेश के विरुद्ध न्यायालय में मंसूर अंसारी ने आवेदन दिया था। न्यायालय ने डीएम के आदेश को सही पाते हुए आवेदन निरस्त कर दिया। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता ने अपने तर्कों को रखा। संवाद
हत्या के प्रयास के दोषी को 15 वर्ष की सजा-गाजीपुर। अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय प्रथम अलख कुमार की अदालत ने बृहस्पतिवार को हत्या के प्रयास के जुर्म में दोषी को 10 साल की सजा के साथ आयुध अधिनियम में पांच साल के कारावास का फैसला सुनाया। साथ ही 15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। जबकि दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। रेवतीपुर थाना के रेवतीपुर गांव निवासी संदीप राय ने थाने में तहरीर दी थी कि बीते 29 अक्टूबर 2010 की शाम 6 बजे अपने चाचा ओमप्रकाश राय अपने घर जा रहे थे। पुरानी रंजिश रखने वाले आरोपी संजय राय के घर के सामने से गुजर रहे थे। इसी दौरान घात लगाये बैठे संजय राय पंकज राय व छोटू उर्फ आंनद राय ने हमला बोल दिया। छोटू ने तमंचे से फायरिंग की। इससे चाचा ओमप्रकाश राय घायल होकर गिर पड़े। वादी संदीप राय की तहरीर पर संजय राय ,पंकज राय व छोटू उर्फ आनंद राय के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से 7 गवाहों को पेश किया गया। दोनों तरफ की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी संजय राय व पंकज राय को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। वहीं छोटू राय उर्फ आनंद को दोषी पाते हुए उपरोक्त सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया गया। संवाद