जिले के विभिन्न मुस्लिम बहुल गांवों में बृस्पतिवार को जुलूस एवं मजलिस-ओ-मातम का सिलसिला जारी रहा। सातवीं मुहर्रम पर अकीदतमंदों ने अलम का जुलूस निकाला गया। इसमें शामिल लोग मिट्टी लेने कर्बला गए। इस दौरान मुकामी और बाहर से आई अंजुमनों ने सीनाजनी, जंजीर का मातम और नौहाख्वानी की।
बहरियाबाद में सातवीं मुहर्रम को शोहदाए कर्बला विशेष रूप से हजरते-अब्बास की याद में स्थानीय कस्बा स्थित मुंतजिर इमाम एवं वजीहुल हसन के आवास स्थित चौक से प्रसिद्ध अलम का जुलूस दोपहर को रवाना हुआ, जो विभिन्न गलियों एवं बाजार होते हुए शाम को कर्बला पहुंचा। यहां से लोग मिट्टी लेकर वापस आए।
इस दौरान अंजुमन गुलामाने मुस्तफा मऊ, अंजुमन-मुंतजरीने मेंहदी, अंजुमन-हुसैनिया के लोगों ने नौहाख्वानी, सीनाजनी तथा जंजीर का मातम किया। शामिल लोग या अली या हुसैन या अब्बास की सदाएं बुलंद करते हुए चल रहे थे।
सहारनपुर से आए मौलाना सादिक हुसैन नकवी ने बहरियाबाद बाजार स्थित आफताब आलम एवं शमशाद अहमद के सहन में जुलूस को खेताब फरमाते हुए कहा कि आपका यह कसीर तादाद बता रहा है कि हम मजलूम के साथ हैं जालिम के साथ नहीं। यजीद तो उसी वक्त हार गया था जब इमाम हुसैन ने कर्बला का रुख किया। इस मौके पर शहंशाह, दानिश, हैदर अब्बास, सलीम अंसारी, कमर इकबाल, अजय सहाय, संदीप सिंह सोनू, शारिब आदि लोग शामिल थे।
मुहम्मदाबाद क्षेत्र में लोगों ने अपने-अपने गंतव्य स्थान से झंडा उठाया। “नारे तकबीर, अल्लाह-हु-अकबर” तथा “या हुसैन, या अली की सदाओं के साथ जुलूस की शक्ल में कर्बला की ओर रवाना हुए। मोहल्लों, गलियों और मुख्य सड़कों से गुजरते हुए यह जुलूस नगर में बनाए गए कर्बला स्थान पर पहुंचकर संपन्न हुआ।
बहादुरगंज कस्बा के मोहल्ला पठान टोली, नाई टोली, छावनी एवं पुरानीगंज से सैकड़ों की संख्या में लोगों ने या अली या हुसैन के नारे के साथ झंडा एवं ताशा, ढोल नगाड़े के साथ जुलूस निकाला। पुलिस चौकी पर आकर सभी जुलूसों का मिलन हुआ।
सदर बाजार, हनुमान मंदिर, बरतर अनार मस्जिद होते हुए चांदनी चौक स्थित कर्बला के मैदान से मिट्टी लेकर अपने-अपने चौक पर चले गए। शादियाबाद और आसपास के गावों में अकीदतमंदों द्वारा अलम का जुलूस निकाला गया।