गाजीपुर। ऊं त्र्यंबकम यहामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम, उर्वारुकमिव बंधनार मृत्योर्मुक्षीय यामृतात के पवित्र मंत्र से सावन के अंतिम सोमवार को शिवालय गूंजते रहे। सावन के चौथे सोमवार को लहुरी काशी शिवमय हो उठी। गंगा में बढ़े जलस्तर के कारण लोग गंगा में डुबकी न लगाकर प्रशासन की ओर से ददरी घाट पर लगाए गए फौव्वारे के पानी से स्नान कर महादेव का जलाभिषेक किए। शहर सहित जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में देवाधिदेव के पूजन की धूम रही। बारिश के बावजूद श्रद्धालु भोर से ही शिव मंदिरों पर पहुंचने लगे थे। उन्होंने विधि-विधान से भगवान शिव का दर्शन-पूजन कर जलाभिषेक किया। मंदिर प्रशासन के अनुमान के मुताबिक प्रसिद्ध महाहर धाम में करीब 50 हजार भक्तों ने शीश नवाकर मंगल की कामना की। इस दौरान हर-हर महादेव, ओम नम: शिवाय और बोल बम का जयकारा गूंजता रहा। अंतिम सोमवार को महिला एवं पुरुष भक्तों ने व्रत रखा था। मंदिरों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए महिला एवं पुरुष पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी।
रविवार रात से ही बारिश का जो सिलसिला शुरू हुआ वह सोमवार को दिन में भी बना रहा। बरसात की परवाह किए बगैर श्रद्धालु भोर से ही शहर के मिश्रबाजार स्थित प्राचीन शिव मंदिर, बड़ा महादेव, चीतनाथ, कोटेश्वरनाथ, अमरनाथ, नवापुरा, ददरीघाट के साथ ही अन्य शिव मंदिरों पर पहुंचे। आसपास की दुकानों से उन्होंने दूध, बेल पत्र, फूल, धूप-दीप आदि पूजन सामग्री की खरीदारी करने के बाद गंगाजल, फूल, बेलपत्र, धतूरा एवं अक्षत आदि अर्पित कर उनका विधिवत पूजन-अर्चन कर जलाभिषेक किए। कुछ भक्तों ने दुग्धाभिषेक भी किया। श्रद्धालुओं के मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए आने-जाने का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
शहर के बड़ा महादेवा पर ज्यादा भीड़ रही
शहर के बड़ा महादेव में श्रद्धालुओं की ज्यादा भीड़ रही। शिव परिवार के साथ ही मंदिरों में नंदी महाराज का भी पूजन-अर्चन किया गया। हर-हर महादेव एवं बोल बम के जयकारे दिन भर गूंजते रहे। मंदिरों के साथ ही घरों में भी पूजा पाठ की गई। कई भक्तों ने घरों में रुद्राभिषेक एवं कथा का भी आयोजन किया था। प्रसिद्ध महाहर धाम में शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही आसपास के अन्य जिलों से करीब 50 हजार शिव भक्त पहुंचे थे। उन्होंने कतारबद्ध होकर भगवान शिव का दर्शन-पूजन किया। शीश झुकाकर जलाभिषेक कर अपनों की मंगल की कामना की। भोर से शुरू हुआ भगवान शंकर के पूजन का क्रम देर शाम तक बना रहा। इस मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अतुल कुमार सोनकर, कासिमाबाद के उप जिलाधिकारी संजय यादव, मुहम्मदाबाद की उप जिलाधिकारी हर्षिता तिवारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव, क्षेत्राधिकारी मुहम्मदाबाद चोब सिंह, सीओ कासिमाबाद अनुभव राजर्षि, खंड विकास अधिकारी कौस्तुभमणि त्रिपाठी, एडीओ पंचायत प्रभाकर पांडेय डॉ. रामप्रवेश सिंह, विरेंद्र सिंह, प्रवीण पटवा आदि मौजूद थे।
शिव मंदिर देवकली, बुढ़वा महादेव मंदिर, मनभद्र बाबा मंदिर पर भी उमड़े श्रद्धालु
गहमर के शिव मंदिर देवकली, बुढ़वा महादेव मंदिर, मनभद्र बाबा मंदिर, करहिया सगरा पोखरा शिव मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने पहले महादेव का जलाभिषेक किया। इसके बाद भांग, धतूरा, बेलपत्र, श्वेत मदार के पुष्प, गन्ना आदि चढ़ाकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। बहादुरगंज के कांवड़िया संघ की ओर से अंतिम सोमवार को कस्बा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के शिवालयों पर श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से जलाभिषेक किया। विजय राघव संगत कुटी स्थित तमसा नदी घाट पर शिवभक्नों ने एकत्रित होकर स्नान कर पूजा करने के बाद पात्र में जल भरकर विजय राघव संगत कुटी शिवालय, खरवा कुटी शिवालय, झिलमिट दास कुटी शिवालय, महावीर घाट शिवालय, मां चंडी धाम शिवालय, बुढ़वा महादेव मंदिर, लमुही स्थित शिवालय आदि शिवालयों पर श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक किया। सिधागरघाट के अवराकोल, मुहम्मदपुर टड़वा, पाली, सुरवत, अवराकोल स्थित मंदिर में दिन भर भोलेनाथ के दर्शन-पूजन की धूम रही।
बाबा चौमुखनाथ धाम धुवार्जुन में भी हुई पूजा
देवकली क्षेत्र के बाबा चौमुखनाथ धाम धुवार्जुन, चकेरी शिव मंदिर, झारखंडे महादेव आदि मंदिर में भक्तों ने विधिपूर्वक शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र से अभिषेक किया। कई भक्तों ने धतूरा, भांग और सफेद पुष्प अर्पित कर भोलेनाथ की कृपा पाने की कामना की। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी।
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आस्था पर भारी पड़ी दिव्यांगता
मरदह। प्रसिद्ध महाहर धाम में सोमवार की देर शाम तक लगभग पचास हजार लोगों ने जलाभिषेक एवं दुग्धाभिषेक करके भोलेनाथ से सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। बीकापुर के दिव्यांग चंद्रशेखर पासवान ने ई-रिक्शा से पहली बार पहुंचकर जलाभिषेक किया। इसी तरह दिव्यांग लावा गांव निवासी राकेश कुशवाहा ने पांचवें वर्ष भी जलाभिषेक किया। किन्नर समाज से जुड़े कन्हैया राजभर ने शादी की मन्नत लेकर पांच वर्ष से जलाभिषेक करने की बात कही। किन्नर हरिओम ने भी लगातार तेरहवें वर्ष जलाभिषेक करके परिजनों संग पूरे समाज के सुख शांति की कामना की।