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तहसील का नहीं बना सका प्रशासनिक भवन

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कासिमाबाद। तहसील के गठन के पांच वर्ष पूरे होने के बाद भी इसका प्रशासनिक भवन नहीं बन पाया है। अधिकारी और कमचारी अभी भी छोटे और जर्जर कमरों में किसी तरह कामकाज निबटा रहे हैं।
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तहसील का सृजन 8 अगस्त 2016 को जिलाधिकारी ने किया था। इससे पूर्व प्रदेश के तत्कालीन राजस्व मंत्री ने लगभग 200 करोड़ के बजट से तहसील सहित जिले की दर्जनों परियोजनाओं का शिलान्यास नेशनल इंटर कॉलेज के मैदान में किया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि तहसील के प्रशासनिक भवन के साथ सारी सुविधाएं एक साथ उपलब्ध कराई जाएगी। सपा सरकार जाने के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार आई। सरकार के साढ़े चार वर्ष पूरे होने जा रहे हैं लेकिन तहसील के प्रशासनिक भवन सहित कोई सुविधा नहीं मिली। अधिवक्ताओं के बैठने के लिए यहां कोई सुविधा नहीं है। सुलभ शौचालय का अभाव है। तहसील में अधिकारियों के साथ कर्मचारियों के लिए बनाए जा रहे आवास पिछले चार वर्ष से जैसे-तैसे बन रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से तहसील का विकास नहीं हो पा रहा है। तहसीलदार डा. विराग पांडेय ने बताया कि प्रशासनिक भवन न होने से यहां पर एक न्यायिक तहसीलदार के साथ दो नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, रजिस्ट्रार कानूनगो के साथ दर्जनों लिपिक के पद खाली हैं। अभी प्रशासनिक भवन के लिए कोई बजट स्वीकृत नहीं हुआ है।
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