गंगा का जलस्तर रविवार को भी स्थिर रहा, लेकिन कृषि योग्य भूमि का कटान जारी रहा। शनिवार की रात में शिवराय का पुरा के पूरब रुक-रुककर कृषि भूमि का हिस्सा कटकर गंगा की धारा में समाता रहा। ग्रामीणों की मानें तो रात में लगभग दो बीघा भूमि कटान की भेंट चढ़ गई है।
गंगा के रौद्र रूप को देख किनारे के लोग दहशत में हैं। गंगा में अरार तक पानी भर जाने से उस पार खेती के लिए आने-जाने वाले किसानों को सिर्फ स्टीमर का सहारा रह गया है। इससे उनको घंटों किनारे बैठकर स्टीमर का इंतजार करना पड़ रहा है। गंगा की तेज धारा से सेमरा गांव को बचाने के लिए बने ठोकर का किनारा मौजा रामतुलाई के पास गंगा में बह गया। इससे गांव में ठोकर के क्षतिग्रस्त होकर बह जाने की आशंका पर चर्चा होने लगी है। जिन लोगों की भूमि कटान की भेंट चढ़ी, उनमें मोतीचंद, सिद्धनाथ यादव, मुनेंद्र पटेल, तुलसी, रमाशंकर प्रजापति, अरुण यादव शामिल हैं।
उपजिलाधिकारी त्रिभुवन विश्वकर्मा, तहसीलदार उमेशचंद्र निगम और क्षेत्राधिकारी मनमोहन पांडेय ने रविवार को स्टीमर से गंगा में बाढ़ और कटान का निरीक्षण किया। उन्होंने हरिहरपुर, बच्छलकापुरा, सेमरा के कटान को देखने के साथ ही ग्रामीणों से इस संबंध में जानकारी प्राप्त की। क्षेत्रीय लेखपाल को जिन लोगों की भूमि कटान में गई है, उनकी सूची तैयार करने का निर्देश दिया।