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Ghazipur News: अब मनरेगा मजदूरों को भी बताना होगा कि मैं जिंदा हूं

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गाजीपुर। अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के सभी सक्रिय मजदूरों को अपने जीवित होने का प्रमाण देना होगा। इसके लिए उनकी ई-केवाईसी कराई जाएगी। यह प्रक्रिया सरकारी पेंशनरों की तर्ज पर शुरू की गई है। इसका उद्देश्य मनरेगा कार्यों में होने वाले फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है। जिले में मनरेगा के कुल 603557 मजदूर है। इनमें 304728 से अधिक सक्रिय मजदूर हैं। अब इन सबकी ई-केवाईसी होगी। न केवल उनकी फोटो बल्कि आधार-आधारित फेस प्रमाणीकरण में पलक झपकने जैसी प्रक्रिया भी शामिल होगी। जिले में अब तक करीब 26,557 मनरेगा मजदूरों की ई-केवाईसी हो गई है। शेष की प्रक्रिया चल रही है। मनरेगा जॉब कार्ड धारक सक्रिय मजदूरों की ई-केवाईसी नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम और आधार फेस प्रमाणीकरण एप के जरिए होगी। मजदूरों के जीवित होने का प्रमाणपत्र इन्हीं एप्स के जरिए वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
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इस तरह रुकेगा फर्जीवाड़ा -कार्यस्थल पर ही मजदूरों के चेहरे का प्रमाणीकरण किया जाएगा। इससे उनकी वास्तविक उपस्थिति दर्ज होगी। अगर कोई पंजीकृत मजदूर स्वयं काम पर नहीं आता और उसकी जगह कोई और काम करता है तो उस व्यक्ति का फेस प्रमाणीकरण नहीं हो पाएगा और उसके काम का रिकॉर्ड दर्ज नहीं होगा। इससे प्रॉक्सी यानी किसी और की जगह काम करने की समस्या पर अंकुश लगेगा।



जॉब कार्ड पर दर्ज सभी सक्रिय मजदूरों की ई-केवाईसी कराना जरूरी है। इसके लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा दिए गए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम और आधार फेस एप का ही उपयोग करना होगा।- विजय यादव, मनरेगा उपायुक्त, गाजीपुर।
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