मानसिक रोगी को अब समाज या परिवार की उपेक्षा का दंश नहीं झोलना पड़ेगा। सरकार ने उनके सामाजिक उत्थान के लिए आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना का निर्णय लिया है। इसके संचालन के लिए स्वैच्छिक संगठनों को अनुदान दिया जाएगा। केन्द्रों के संचालन के लिए जिला विकलांग जन विकास विभाग की तरफ से आवेेदन पत्र मांगे गए हैं।
सरकार की ओर से मानसिक रोगी के विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है।
इसके तहत शासन की ओर से आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केन्द्रों के संचालन के लिए स्वैच्छिक संगठनों को अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। इस अनुदान का उद्देश्य यह है कि विक्षिप्त अवस्था में भटक रहे लोगों को आश्रय, भोजन, वस्त्र, दैनिक दिनचर्या एवं देखभाल, कौशल विकास प्रशिक्षण के साथ ही दैनिक कार्यों के संपादन संबंधी प्रशिक्षण दिया जाना है। यही नहीं बिछड़े आश्रयहीन मानसिक रोगी को उनके परिवार से मिलाने का भी कार्य किया जाएगा।
उनके परिवार के लोगों को देखभाल के लिए आवश्यक प्रशिक्षण स्वैच्छिक संस्था की तरफ से दिया जाएगा। प्रत्येक संवासी की दैनिक क्रियाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अपेक्षित व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराई जाएगी। केन्द्र में रसोई, शौचालय आदि को छोड़कर केवल लाभार्थी की आवासीय सुविधा के लिए प्रति लाभार्थी कम से कम 50 वर्गफीट का स्थान उपलब्ध होगा। जिला विकलांग जन विकास अधिकारी कार्यालय की तरफ से अनुदान के लिए स्वैच्छिक संस्थाओं से निर्धारित आवेदन पत्र पर आवेदन आमंत्रित किया गया है।
आवेदन प्राप्त करने के बाद संस्था का निरीक्षण किया जाएगा। मालूम हो कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में 79870 विकलांग हैं। इनमें से करीब 10 हजार मानसिक रोगी हैं।