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Ghazipur News: नौकरी मिलने पर प्रशिक्षण के दौरान नहीं मिलेगा वेतन, देनी होगी फीस

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बिरनो विकासखंड परिसर में आयोजित रोजगार मेले में शामिल अभ्यर्थी। संवाद
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गाजीपुर/भरसर। युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बिरनो विकास खंड परिसर में बृहस्पतिवार को आयोजित दो दिवसीय रोजगार मेले में चयन प्रक्रिया से अधिक प्रशिक्षण की शर्तें चर्चा का विषय बन गईं। मेले में पहुंचे युवाओं ने आवेदन शुल्क और चयन के बाद एक महीने के प्रशिक्षण के लिए निर्धारित शुल्क पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई। उनका कहना है कि प्रशिक्षण अवधि में वेतन भी नहीं मिलेगा, ऐसे में शुल्क लेना समझ से परे है। बंतरा निवासी गोलू यादव ने बताया कि आवेदन के समय 350 रुपये लिए जा रहे हैं। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों से प्रशिक्षण के लिए 10,900 रुपये जमा करने को कहा जा रहा है। उनका कहना है कि रोजगार की उम्मीद लेकर पहुंचे आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं है।
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शेखपुर निवासी प्रदीप कुशवाहा ने बताया कि चयनित अभ्यर्थियों का एक महीने का प्रशिक्षण जौनपुर के सैनिक गिरजा शंकर महाविद्यालय, सरौनी (केराकत) में कराया जाएगा। इस दौरान रहने और भोजन की व्यवस्था निशुल्क बताए जाने के साथ यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस अवधि में कोई वेतन नहीं मिलेगा। मेले में पहुंचे कई अभ्यर्थियों ने मांग की कि यदि प्रशिक्षण अनिवार्य है तो उसकी पूरी प्रक्रिया, शुल्क और चयन के बाद मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी पहले से सार्वजनिक की जाए, ताकि युवाओं में किसी प्रकार की भ्रम न रहे। रोजगार की तलाश में पहुंचे युवाओं के बीच पूरे दिन इसी मुद्दे को लेकर चर्चा होती रही।

मैं इस इस वक्त इलाहाबाद हाईकोर्ट में हूं और मुझे शुल्क वसूलने की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो गलत है, बेरोजगार युवा कहां से पैसा देंगे। मामले की जांच कराई जाएगी।-कौस्तुभ मणि पाठक, बीडीओ, बिरनो।
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मुझे रोजगार मेले के आयोजन की जानकारी नहीं है। विवादित शर्तों के कारण ही मेरे द्वारा उनको अनुमति नहीं दी गई। संभव है एसडीएम सदर के कार्यालय से पूर्व में एक पत्र जारी हुआ था। इस बारे में वहीं कुछ बता पाएंगे। -विवेकानंद सिंह, जिला सेवा योजन अधिकारी।

रोजगार मेले के संबंध में मुझको जानकारी नहीं है। न ही मेरे हस्ताक्षर से इस तरह का कोई पत्र जारी हुआ है।-विनोद जोशी, प्रभारी एसडीएम सदर।
चयनित युवाओं की वर्दी और अन्य खर्च के लिए 10900 रुपये लिए जाते हैं, जबकि उनके प्रशिक्षण पर 29 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसलिए कंपनी मानदेय नहीं देती है।-रजनीश राय, ग्रुप कमांडर, एसआईएस।
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