गहमर। क्षेत्र में मोटे अनाज की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और अनुकूल वातावरण होने के बावजूद रागी, सांवा जैसी फसलों की खेती करने से किसान कतरा रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार ने मोटे अनाज के लिए कोई समर्थन मूल्य जारी नहीं किया है, न इसके लिए बाजार ही उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में इसकी खेती करने पर मेहनत और पैसा दोनों व्यर्थ जाता है। लिहाजा सिर्फ वैसी ही फसलों की वह खेती करते हैं, जिनकी बिक्री सहज रूप से हो जाती है। रागी, सांवा, टांगुन, कोदो, ज्वार, बाजरा और मक्का आदि जैसे मोटे अनाज का सेवन शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में बहुत कारगर हैं। सरकार द्वारा मोटे अनाज की खेती पर जोर दिया जाने लगा है। इसके लिए किसानों को जागरूक करने से लेकर उन्हें विभिन्न प्रकार के अनुदान की योजनाएं भी बनाई गई हैं। भदौरा विकास खंड का काफी बड़े क्षेत्र की मिट्टी और यहां का वातावरण मोटे अनाज की खेती के अनुकूल है। बावजूद इसके क्षेत्र के किसान सिर्फ मक्का, ज्वार और बाजरा की खेती तक ही सीमित होकर रह गए हैं। किसानों का कहना है कि सरकार मोटे अनाज की खेती पर जोर भले दे रही है परंतु फसल बेचने के लिए कहां ले जाएं, ये बड़ा सवाल है।
पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मौजूद- गहमर। मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी आदि पोषक तत्वों के पावर हाउस हैं। इनमें उच्च प्रोटीन स्तर के साथ ही संतुलित एमीनो एसीड मौजूद होने के कारण इसे गेहूं, चावल और मक्का से बेहतर माना गया है। इन फसलों के अनाज में सूजन रोधी के साथ एंटी आक्सीडेंट गुण भी मौजूद होता है। इनमें फाइबर, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्निशियम, लोहा आदि खनिजों के साथ ही बी कॉम्पलेक्स विटामिनों का समृद्ध स्रोत होने से टाइप 2 मधुमेह और मोटापे के प्रबंधन में काफी सहायक होता है।
मोटे अनाज की पैदावार कम और कटाई में काफी मेहनत होती है। बावजूद इसके फसल का उचित दाम किसानों को नहीं मिल पाता है।-डॉ. विनय सिंह, हथौरी
मोटे अनाजों की खेती में जोखिम ज्यादा है। कम वर्षा होने पर फसल खराब हो जाती है। इसके साथ ही कोदो, कंगनी और सांवा जैसी फसलों के खरीद तक की गारंटी नहीं है।- रविशंकर उपाध्याय, करहिया
सालों पहले किसान बड़े क्षेत्रफल में सांवा, टांगुन, कोदो आदि फसलों की खेती करते थे, लेकिन उपज तैयार होने के बाद इन फसलों का कोई खरीदार नहीं मिलता था। इससे किसानों को खुद ही सेवन करते हुए खपत करनी पड़ती थी।-घनश्याम उपाध्याय, खुदरा
एक समय था जब खेती सिर्फ पेट भरने के लिए की जाती थी। आज इसका स्वरूप पूरी तरह आमदनी के जरिया के रूप में बदल गया है। मुरली कुशवाहा, गहमर
मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों के बीच इस साल रागी और सांवा के बीजों का मुफ्त वितरण किया गया है। साथ ही मोटे अनाज की खेती के लिए किसानों का कलस्टर तैयार कर उन्हें जोड़ा जा रहा है।-उमेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी