दिलदारनगर। 100 वषों से अधिक पुरानी ईंटों के संग्रह के लिए स्थानीय निवासी कुंअर नसीम रजा का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है। उनका नाम रिकॉर्ड में दर्ज होने से लोगों में खुशी है। उनके संग्रहालय में मुगलकालीन दस्तावेज, पांडुलिपियां, फरमान, देश-विदेश के सिक्के-नोट और किताबों का संग्रह है। साथ ही 100 वर्षों के हजारों शादी के कार्ड, 786 अंकित सामान, प्राचीन पुरातात्विक महत्व के पुरावशेष संग्रहित हैं।
नसीम रजा के पास 1896 ईस्वी से 1996 ईस्वी तक के वर्षवार 72 ईंटों का संग्रह है। उन्होंने बताया कि भारत में ईंटों पर चिह्न तथा निशान, सन दिनांक, वर्ष, व्यक्तिगत नाम अंकित करने की प्रथा उन्नीसवीं सदी में ब्रिटिश शासन काल के दौरान शुरू हुई। यह परंपरा 20वीं सदी के 90 के दशक तक लगतार जारी रही। 2वीं सदी में ईंटों पर तिथि का अंकन लगभग समाप्त हो चुका था। अब केवल चिह्न, निशान, व्यक्तिगत नाम, मार्का देखे जा रहे हैं, दिनांकित वर्षवार ईंट बनना, तैयार करना लगभग समाप्त हो चुका है।उनका दावा है कि देश के विभिन्न राज्यों तथा प्राचीन शहरों, प्राचीन ऐतिहासिक इमारतो, खंडहरों, पुरानी गलियों तथा दरगाहों, कब्रिस्तानों से वर्षवार ईंटों को एकत्रित करने में सफलता मिली है। इनके पास संग्रहित ईंटों पर ईस्वी सन, हिजरी सन् तथा फसली वर्ष जिसमें हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी आदि भाषाओं में अंकन है। वहीं सर्वाधिक ऐतिहासिक महत्व की वर्षवार टेराकोटा ईंट के अनोखे और दुर्लभ संग्रह में पिछले 128 वर्ष पुराने तथा 100 वर्ष में सर्वाधिक 72 ईंट के दुर्लभ संग्रह करने पर उनका नाम सर्वेक्षण के उपरांत 27 मई को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड-2024 में दर्ज किया गया। साथ ही राष्ट्रीय और उच्च स्तरीय सम्मान-पत्र से नवाजा गया। उनको शुक्रवार को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की प्रकाशित पुस्तक डाक के माध्यम से प्राप्त हुआ। साथ ही सम्मानपत्र, पेन, बैज, वाहन स्टीकर भी प्राप्त हुआ है।