बिरनो। थाना क्षेत्र के तिलेसड़ा (रसूलपुर) निवासी एक युवक पांच दिन पूर्व लखनऊ घूमने गया था। शुक्रवार को उसका शव वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के गोमती नदी के किनारे मिलने की जानकारी होने पर परिजनों में चीख- पुकार मच गई। परिजन थाने पर पहुंच हत्या की आशंका जताते हुए कार्रवाई की मांग करने लगे।
तिलेसड़ा ( रसूलपुर) निवासी आलोक यादव (30) बीते 10 जून की शाम लखनऊ घूमने की बात कहकर घर से निकला। बीते 11 जून को कोई जानकारी नहीं मिलने पर परिजन उसकी तलाश में जुट गए। काफी प्रयास के बाद भी उसका पता नहीं चला तो मृतक का छोटा भाई प्रदीप यादव थाने पहुंचा और बड़े भाई के गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दी। इस पर पुलिस ने उसे वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के गोमती नदी के किनारे मिले शव की फोटो दिखाया, जिसको देखते ही प्रदीप यादव दहाड़े मारकर रोने लगा। इसके बाद वह परिजनों के साथ चौबेपुर थाना पहुंचा। वहां चौबेपुर थाना प्रभारी विद्याशंकर शुक्ला ने शव मॉच्यूरी में होने की बात कही। शिवपुर मॉच्यूरी पहुंचकर परिजनों ने मृतक की शिनाख्त की। मृतक तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। वह करीब छह साल बाद सऊदी से बीते तीन मार्च को घर आया था। थानाध्यक्ष अशोक मिश्रा ने बताया कि देर शाम पता चला है कि मृतक आलोक यादव इसी थाना क्षेत्र का निवासी है। चौबेपुर थानाध्यक्ष से समन्वय स्थापित कर कर घटना के विषय में जानकारी ली जाएगी।
21 अप्रैल को हुई थी शादी, 11 जून को मिला शव
प्रदीप ने बताया कि आलोक की शादी गत 21 अप्रैल को बलिया जिले के नगरा क्षेत्र के हरसेनपुर गांव की प्रतिभा यादव से हुई थी। आलोक शादी के उद्देश्य से ही सऊदी अरब से घर आया था। आलोक की मौत की जानकारी पाकर उसकी पत्नी प्रतिभा और मां सुशीला देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उधर, आलोक का लहूलुहान शव वाराणसी-गाजीपुर हाईवे से 500 मीटर दूर पूर्व की ओर राजवारी (भंदहां कला) गांव में गोमती नदी के समीप बबूल के जंगल में 10 जून की सुबह मिला था। उसके सिर, आंख और कनपटी पर गहरे जख्म थे। शव के समीप अंग्रेजी शराब की खाली शीशी, प्लास्टिक के चार ग्लास, चिप्स के खाली पैकेट और काले रंग के दो मास्क पड़े थे। पुलिस के अथक प्रयास के बाद भी शव की पहचान नहीं हो पाई थी। 72 घंटे बीतने के बाद शुक्रवार को पुलिस शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी में थी, तब तक प्रदीप चौबेपुर थाने पहुंच गया।